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Pithoragarh News: सीमांत जिले के 16 पशु अस्पताल चिकित्सक विहीन

Wed, 24 May 2023 11:22 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Wed, 24 May 2023 11:22 PM IST
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16 veterinary hospitals of frontier district without doctor
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में लंपी बीमारी ने बड़ी संख्या में पशुओं को अपनी चपेट में लिया है। अभी भी कई जगहों पर बीमारी के नए मामले आने से पशुपालन विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ी है। हालांकि सीमित संसाधनों के बीच बीमारी पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है।
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जनपद में कुल 31 पशु अस्पताल हैं। इनमें से छह किराए पर और 25 सरकारी अस्पताल हैं। जिले में 1.60 लाख गाय और 37 हजार भैंस हैं। लंपी बीमारी गोवंश में अधिक पाई जा रही है। अपर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पंकज जोशी ने बताया कि राजकीय भवन पिथौरागढ़ अस्पताल, मूनाकोट, सिंतोली, जाख, बड़ाबे, मड़मानले, कनालीछीना, पीपली, अस्कोट, डीडीहाट, थल, बेड़ीनाग, धारचूला, बलुवाकोट, खेत, बरम, जौलजीबी, मुनस्यारी, तेजम और नाचनी में हैं।
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गंगोलीहाट, राममंदिर, गनाई, पांखू में भी सरकारी भवन हैं। झूलाघाट, ख्वांकोट, सेरा पव्वाधार, चोरपाल, भागीचौरा में पशु अस्पताल किराए पर चल रहे हैं। 31 पशु अस्पतालों में से 16 में चिकित्साधिकारी के पद रिक्त चल रहे हैं। पशुधन प्रसार अधिकारी के स्वीकृत 86 पदों के सापेक्ष 27 पर ही कार्मिक तैनात हैं। इसके चलते विभाग को बीमारी नियंत्रित करने में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बीमारी पर अंकुश लगाने को नैनीताल और ऊधमसिंह नगर से एक हफ्ते के लिए 27 पशुधन प्रसार अधिकारियों को यहां भेजा गया।
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पशुपालक खुद नहीं आते दवा लेने
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में लंपी वायरस का प्रकोप है। इसके बावजूद पशुपालक जागरूक नहीं है। पशु के बीमार होने पर वह विभागीय अधिकारी, कर्मियों को फोन पर सूचना देते हैं। एक विभागीय कार्मिक तीन से अधिक गांवों में बीमारी की रोकथाम में लगा है। ऐसे में उसे बीमार पशु तक पहुंचने में दो से तीन दिन लग जा रहे हैं। विभाग की ओर से पशुओं को नहलाने के लिए दवा दी जा रही है। कई तो ऐसे हैं कि वह पशु को नहला भी नहीं रहे हैं। साथ ही पशुओं को संजीदा होकर दवा भी नहीं खिला रहे हैं।
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50 हजार पशुओं को लगाए टीके
पिथौरागढ़। पशुपालन विभाग ने मंगलवार तक 50 हजार पशुओं का टीकाकरण कर लिया है। डिप्टी सीवीओ पंकज जोशी ने बताया कि अभी विभाग के पास वैक्सीन की करीब 10 हजार डोज बची हैं। बीमारी को देखते हुए 15 हजार डोज और मंगाई जाएंगी। उन्होंने पशुपालकों से बीमार पशु को अलग से रखने की नसीहत दी है। संवाद
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पशुओं में बीमारी के 34 नए मामले फिर मिले
पिथौरागढ़। जिले में अभी भी 486 पशु लंपी बीमारी से ग्रसित हैं। साथ ही विण, जाख, गंगोलीहाट, धारचूला, बेड़ीनाग, पांखू और मुनस्यारी में 34 नए मामले सामने आए हैं। संवाद
फोटो 23 पीटीएच 21 पी-पिथौरागढ़ में पशुपालकों को दवा वितरित करती टीम। संवाद
---- लंपी : रोजाना 2100 लीटर दूध के उत्पादन में आई कमी
23 पशु सेवा केंद्रों में से 11 में पशु प्रसार अधिकारी नहीं
जिले में वर्तमान में बीमार हैं 157 से ज्यादा मवेशी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। जिले के कई इलाकों में लंपी का प्रकोप अभी भी जारी है। दुधारू मवेशियों के बीमार होने से इलाज पर खर्च के अलावा दुग्ध उत्पादन में भी गिरावट हो रही है। चंपावत जिले में रोजाना औसतन 2100 लीटर दूध के उत्पादन में कमी आई है। दुग्ध संघ के प्रबंधक पुष्कर नगरकोटी का कहना है कि पहाड़ में मई-जून के मौसम में दूध के उत्पादन में इजाफा होता है लेकिन इस बार लंपी रोग से अप्रैल से ही दूध बढ़ने के बजाय कम होने लगा है। लंपी रोग से अब तक 157 से ज्यादा मवेशी बीमार है। जबकि 35 से अधिक पशुओं की अप्रैल से अब तक मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग शिविर लगाकर रोकथाम का प्रयास जरूर कर रहा है लेकिन स्टाफ की कमी इसमें आड़े आ रही है। पशुपालन विभाग के 11 पशु सेवा केंद्रों में पशु प्रसार अधिकारी नहीं होने से भी दिक्कत आ रही है। जिले में 79,686 गाय और 18,599 भैसें हैं। चंपावत जिले के 15 पशु अस्पतालों में से दो में डॉक्टर नहीं है।
सबसे ज्यादा दिक्कत पशु प्रसार अधिकारियों की कमी से है। जिले के 23 पशु सेवा केंद्रों में से 11 में कोई कर्मी नहीं होने से पशुपालकों को मुश्किल हो रही है। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश से लेकर भिंगराड़ा तक के पशु सेवा केंद्रों में ताले लटके हैं। गुमदेश, तल्लादेश, तल्लापाल और लधिया घाटी में मवेशियों के बीमार पड़ने से लोगों को पशुओं के इलाज के लिए पशु अस्पताल जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

फोटो 23 सीपीटी 10पी व 11पी। 10पी: कर्मियों की कमी से तल्लादेश के मंच का बंद पशु सेवा केंद्र। संवाद 11पी: चंपावत ब्लॉक में गाय का टीकाकरण करते पशुपालन विभाग के कर्मी। संवाद
कोट
रोगों से बचाव के लिए जिले भर में 15 टीम गठित की गईं हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विभागीय टीम मौके पर भेजी जा रही है। सामान्य बीमार मवेशियों के लिए पशुसेवक दवा अस्पताल से ले जा रहे हैं। दो प्रशिक्षु फील्ड कर्मियों को रीठा साहिब और रौसाल भेजा गया है। इसके अलावा बाएफ के कर्मियों को भी संवेदनशील जगहों में लगाया गया है। - डॉ. पीएस भंडारी, सीवीओ, चंपावत।

इनसेट
इन 11 पशु सेवा केंद्रों में नहीं हैं पशुधन प्रसार अधिकारी
मंच, तामली, देवीधुरा, जोश्यूड़ा, चौड़ामेहता, भिंगराड़ा, बसेड़ी, पुलहिंडोला, रौसाल, खतेड़ा और सूखीढांग।
इनसेट
पशुधन सहायकों के खाली पद
पशु प्रजनन प्रक्षेत्र नरियालगांव : अंगोरा शशक प्रजनन प्रक्षेत्र, पशु अस्पताल चंपावत, सचल पशु अस्पताल, बाराकोट, टनकपुर और केंद्रीय भंडार में दो-दो, चल्थी, लोहाघाट, चमदेवल, बदाखजन, रेगड़ू, पाटी और खेतीखान में एक-एक।
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