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थलकेदार को जैव विविधता धरोहर स्थल बनाने की कवायद
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दिनेश अवस्थी
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय का नजदीकि जैव विविधता से परिपूर्ण वन आच्छादित क्षेत्र थलकेदार (2480 मीटर) को वन विभाग ने जैव विविधता धरोहर स्थल घोषित करने की कवायद शुरू कर दी है। इस संबंध में विभाग को ओर से बायो डायवर्सिटी बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है।
प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. विनय भार्गव ने बताया कि थलकेदार में रिजर्व फारेस्ट 600 हेक्टेयर क्षेत्र में है। जैव विविधता बोर्ड से क्षेत्र की धरोहरों, वन्य जीवों के प्राकृतिक वास, पेयजल स्रोतों को बचाने की कवायद की जा रही है। जैव विविधता बोर्ड को वन विभाग ने धरोहर के लिए पांच लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा। इसके सापेक्ष पहले चरण में 2.50 लाख रुपया विभाग को मिला। उन्होंने बताया कि इस धनराशि से भिलौंत, तोली, देवदार, बड़ाबे, ज्ञालपानी, पत्थरखानी, मांड गांवों की धरोहर, बांज का जंगल, मंदिर, वन्य जीवों के प्रकृति आवास विकसित किए जा रहे हैं। जंगलों में पुराने समय के पीलरों का सीमांकन किया जा रहा है।
ग्रामीणों के 12 सदस्यीय टीम का गठन कर पवित्र वन का अध्ययन किया जा रहा है। क्षेत्र में पहले कौन सी प्रजातियां, जीव-जंतु आदि थे उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। वन विभाग की ओर क्षेत्र में कार्य कर रही मानव एवं पर्यावरण विकास समिति क्षेत्र में कार्य कर ही है। यहां बांज, बुरांश, खर्सू, मोरू का सघन वन है। साथ ही वन्य जीव सांभर, खरगोश, हिरण, घुरल, तेंदुआ, हिमालयन काला भालू, मैना आदि प्रचुर मात्रा में है। इसके साथ ही किल्मोड़ा, घिंघारू, तिमूर, समेना, चिरायता, सालममिश्री, वनहल्दी आदि पर्याप्त है। वन विभाग ने क्षेत्र की पूरी रिपोर्ट बोर्ड को भेज दी है। डॉ. भार्गव ने बताया कि दूसरे चरण में हेरीटेज साइट विकसित किया जाएगा।
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पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय का नजदीकि जैव विविधता से परिपूर्ण वन आच्छादित क्षेत्र थलकेदार (2480 मीटर) को वन विभाग ने जैव विविधता धरोहर स्थल घोषित करने की कवायद शुरू कर दी है। इस संबंध में विभाग को ओर से बायो डायवर्सिटी बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है।
प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. विनय भार्गव ने बताया कि थलकेदार में रिजर्व फारेस्ट 600 हेक्टेयर क्षेत्र में है। जैव विविधता बोर्ड से क्षेत्र की धरोहरों, वन्य जीवों के प्राकृतिक वास, पेयजल स्रोतों को बचाने की कवायद की जा रही है। जैव विविधता बोर्ड को वन विभाग ने धरोहर के लिए पांच लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा। इसके सापेक्ष पहले चरण में 2.50 लाख रुपया विभाग को मिला। उन्होंने बताया कि इस धनराशि से भिलौंत, तोली, देवदार, बड़ाबे, ज्ञालपानी, पत्थरखानी, मांड गांवों की धरोहर, बांज का जंगल, मंदिर, वन्य जीवों के प्रकृति आवास विकसित किए जा रहे हैं। जंगलों में पुराने समय के पीलरों का सीमांकन किया जा रहा है।
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ग्रामीणों के 12 सदस्यीय टीम का गठन कर पवित्र वन का अध्ययन किया जा रहा है। क्षेत्र में पहले कौन सी प्रजातियां, जीव-जंतु आदि थे उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। वन विभाग की ओर क्षेत्र में कार्य कर रही मानव एवं पर्यावरण विकास समिति क्षेत्र में कार्य कर ही है। यहां बांज, बुरांश, खर्सू, मोरू का सघन वन है। साथ ही वन्य जीव सांभर, खरगोश, हिरण, घुरल, तेंदुआ, हिमालयन काला भालू, मैना आदि प्रचुर मात्रा में है। इसके साथ ही किल्मोड़ा, घिंघारू, तिमूर, समेना, चिरायता, सालममिश्री, वनहल्दी आदि पर्याप्त है। वन विभाग ने क्षेत्र की पूरी रिपोर्ट बोर्ड को भेज दी है। डॉ. भार्गव ने बताया कि दूसरे चरण में हेरीटेज साइट विकसित किया जाएगा।
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