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तिकसैन का स्कूल भवन भूकंपरोधी बनेगा
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:46 PM IST
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। राजकीय प्राथमिक विद्यालय तिकसैन के भवन को भूकंपरोधी तकनीक से बनाया जा रहा है। टाटा रिलीफ कमेटी ने सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम के तहत इस भवन का निर्माण शुरू किया है। भवन निर्माण की जिम्मेदारी हिमालयन कंस्ट्रक्शन कंपनी देहरादून को दी गई है।
अभियंताओं ने बताया कि भवन को बनाते समय भूकंपरोधी मानकों का पूरा ध्यान दिया गया है। इसकी बुनियाद, दीवारों को इस तकनीक से बनाया गया है कि भूकंप के झटकों को सहन कर सके। टाटा के सहयोग से जीआईसी मवानीदवानी और बरम में भी भवनों का निर्माण किया जा रहा है।
टाटा के कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद रावत, अवर अभियंता आरती चंद, चंद्र कुमार, हिमालयन कंस्ट्रक्शन कंपनी के परियोजना समन्वयक उजैर अजहर, सहायक अभियंता हसीन अहमद, अमित कुमार और मोहम्मद गुलरेज की देखरेख में तिकसैन स्कूल भवन की छत पर लिंटर डाला गया। इन लोगों ने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में भूकंप आते रहते हैं। यदि स्कूल भवनों को भूकंपरोधी तकनीक से बनाया जाए तो किसी प्रकार का खतरा नहीं होगा।
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उन्होंने कहा कि यह कोशिश की जाएगी कि कुछ अन्य स्कूल भवनों का भी इसी तकनीक से निर्माण किया जाए। आम लोगों से भी उन्होंने अपील की कि वह भूकंपरोधी भवनों का निर्माण करें। भूकंपरोधी भवनों में सामग्री की लागत कम आती है। भवनों का वजन कम रहता है। इस कारण इनमें खतरे भी कम होते हैं।
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अभियंताओं ने बताया कि भवन को बनाते समय भूकंपरोधी मानकों का पूरा ध्यान दिया गया है। इसकी बुनियाद, दीवारों को इस तकनीक से बनाया गया है कि भूकंप के झटकों को सहन कर सके। टाटा के सहयोग से जीआईसी मवानीदवानी और बरम में भी भवनों का निर्माण किया जा रहा है।
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टाटा के कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद रावत, अवर अभियंता आरती चंद, चंद्र कुमार, हिमालयन कंस्ट्रक्शन कंपनी के परियोजना समन्वयक उजैर अजहर, सहायक अभियंता हसीन अहमद, अमित कुमार और मोहम्मद गुलरेज की देखरेख में तिकसैन स्कूल भवन की छत पर लिंटर डाला गया। इन लोगों ने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में भूकंप आते रहते हैं। यदि स्कूल भवनों को भूकंपरोधी तकनीक से बनाया जाए तो किसी प्रकार का खतरा नहीं होगा।
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उन्होंने कहा कि यह कोशिश की जाएगी कि कुछ अन्य स्कूल भवनों का भी इसी तकनीक से निर्माण किया जाए। आम लोगों से भी उन्होंने अपील की कि वह भूकंपरोधी भवनों का निर्माण करें। भूकंपरोधी भवनों में सामग्री की लागत कम आती है। भवनों का वजन कम रहता है। इस कारण इनमें खतरे भी कम होते हैं।