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Pithoragarh News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 15 साल की सश्रम सजा
Thu, 13 Jul 2023 11:06 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 13 Jul 2023 11:06 PM IST
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पिथौरागढ़। विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) शंकर राज ने नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के दोषी गणेश सिंह वल्दिया को 15 वर्ष के सश्रम कारावास और 70 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामले के अनुसार जिले के एक गांव निवासी छात्रा पीजी काॅलेज पिथौरागढ़ में पढ़ती थी और परीक्षा देने के लिए अपनी मौसी के घर में रह रही थी। 12 मई 2022 को वह परीक्षा देने गई लेकिन काफी समय तक घर नहीं लौटी। जब उसकी खोजबीन की गई तो वह ऐंचोली निवासी गणेश सिंह वल्दिया के कमरे में मिली। जांच में पता चला कि गणेश सिंह उसका नजदीकी रिश्तेदार था और डरा धमकाकर लंबे समय से उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था जिससे वह गर्भवती हो गई थी। नाबालिग छात्रा की माता ने ऐंचोली निवासी गणेश सिंह के खिलाफ पुलिस में तहरीर सौंपी।
पिथौरागढ़ कोतवाली में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 376 (2) (च) (ढ़) और 506 के तहत केस दर्ज किया गया। यह मामला विशेष सत्र न्यायालय में चला। दोनों पक्षाें को सुनने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने दोष सिद्ध करते हुए अभियुक्त गणेश सिंह वल्दिया को धारा 363 के तहत सात साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
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धारा 376 (2) (च) (ढ) के तहत 15 साल के कठोर कारावास और 50 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर पांच साल का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। धारा 506 के तहत सात साल के कठोर कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड की धनराशि में से 50 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में पीड़िता को देने के निर्देश दिए गए।
विशेष सत्र न्यायाधीश ने कहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। इस कृत्य से उसे शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा है। विशेष सत्र न्यायाधीश की ओर से पीड़िता को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत राज्य सरकार से अतिरिक्त प्रतिकर दिलाए जाने के निर्देश भी दिए गए। मामले की पैरवी डीजीसी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।
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मामले के अनुसार जिले के एक गांव निवासी छात्रा पीजी काॅलेज पिथौरागढ़ में पढ़ती थी और परीक्षा देने के लिए अपनी मौसी के घर में रह रही थी। 12 मई 2022 को वह परीक्षा देने गई लेकिन काफी समय तक घर नहीं लौटी। जब उसकी खोजबीन की गई तो वह ऐंचोली निवासी गणेश सिंह वल्दिया के कमरे में मिली। जांच में पता चला कि गणेश सिंह उसका नजदीकी रिश्तेदार था और डरा धमकाकर लंबे समय से उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था जिससे वह गर्भवती हो गई थी। नाबालिग छात्रा की माता ने ऐंचोली निवासी गणेश सिंह के खिलाफ पुलिस में तहरीर सौंपी।
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पिथौरागढ़ कोतवाली में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 376 (2) (च) (ढ़) और 506 के तहत केस दर्ज किया गया। यह मामला विशेष सत्र न्यायालय में चला। दोनों पक्षाें को सुनने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने दोष सिद्ध करते हुए अभियुक्त गणेश सिंह वल्दिया को धारा 363 के तहत सात साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
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धारा 376 (2) (च) (ढ) के तहत 15 साल के कठोर कारावास और 50 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर पांच साल का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। धारा 506 के तहत सात साल के कठोर कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड की धनराशि में से 50 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में पीड़िता को देने के निर्देश दिए गए।
विशेष सत्र न्यायाधीश ने कहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। इस कृत्य से उसे शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा है। विशेष सत्र न्यायाधीश की ओर से पीड़िता को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत राज्य सरकार से अतिरिक्त प्रतिकर दिलाए जाने के निर्देश भी दिए गए। मामले की पैरवी डीजीसी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।