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व्यास घाटी बंद होने पर दारमा से कैलाश यात्रा का प्रस्ताव
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डीडीहाट। कैलास मानसरोवर यात्रा को व्यास घाटी का मार्ग बंद होने पर दारमा घाटी से संचालित किया जाएगा। इस पर अभी कुमाऊं मंडल विकास निगम और जिला प्रशासन की सहमति ली जानी है। दारमा घाटी से यात्रा के कई फायदे भी गिनाए जा रहे हैं। आईटीबीपी भी दारमा घाटी के बंद मार्गों को जून से पहले खोलने पर सहमत हो गया है। दिल्ली में विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में केएमवीएन, जिला प्रशासन और आईटीबीपी के अधिकारियों की बैठक में यह फैसला किया गया है। बैठक में यह प्रस्ताव भी आईटीबीपी की ओर से रखा गया।
प्रतिवर्ष जून में कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू होती है। यात्रा सितंबर में पूरी होती है। पिछले वर्ष भारी बरसात के चलते यात्रियों को कई दिनों तक गुंजी, पिथौरागढ़ और अन्य जगहों पर रुकना पड़ा। धारचूला के नजंग और उससे आगे रास्ता खराब होने से केएमवीएन की ओर से यात्रियों को हेलीकाप्टर की सुविधा मुहैया कराई गई थी।
आईटीबीपी बरेली क्षेत्र के डीआईजी आनंद पाल सिंह निंबाडिया ने व्यास घाटी बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग के तौर पर दारमा वैली से यात्रा कराने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यदि व्यास घाटी के रास्ते खुले होते हैं तो वापसी में यात्रियों को दारमा घाटी के रास्ते वापस लाया जाए। इससे यात्री छोटा कैलास के भी दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने मौसम या रास्ते खराब होने की स्थिति में हेलीकाप्टर सेवा धारचूला से बूंदी और गुंजी लाया जा सकता है। प्रशासन का प्रस्ताव था कि यात्रा सीजन में बारिश अधिक तो यात्रियों की संख्या कम कर 15 अगस्त के बाद यह संख्या बढ़ाई जा सकती है। बीआरओ ने भरोसा दिलाया है कि यात्रा से पूर्व व्यास घाटी में मार्गों को खोल दिया जाएगा। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने सिरखा स्थित टीआरसी की खस्ताहाल स्थिति को देखते हुए गाला के रास्ते यात्रा का प्रस्ताव रखा।
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दारमा घाटी से प्रस्तावित कैलास यात्रा मार्ग
पिथौरागढ़। आईटीबीपी की ओर से प्रस्तावित दारमा घाटी से कैलास मानसरोवर यात्रा का पैदल मार्ग महज 42 किमी होगा। इस मार्ग में यात्री वाहनों के जरिए धारचूला से सोबला, दर, दुग्तु, दांतू, सौन होते हुए बालिंग पहुंचेंगे। बालिंग में रात्रि विश्राम कर वाहन से चार किमी की आगे की यात्रा करेंगे। इसके बाद 10 किमी की दूरी तय कर वेदांग (12500 फीट) पहुंचेंगे। यहां यात्रियों को उच्च हिमालयी क्षेत्र के अनुकूल खुद को ढालने के लिए दो दिन का विश्राम दिया जाएगा। उसके बाद वेदांग से यात्री नौ किमी की कठिन चढ़ाई पार कर सेलापास पहुंचेंगे। सेलापास से ज्योलिंगकांग, कुटी होते हुए गुंजी पहुंचेंगे। दारमा घाटी से महज पांच दिन में पैदल यात्रा पूरी हो जाएगा।
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प्रतिवर्ष जून में कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू होती है। यात्रा सितंबर में पूरी होती है। पिछले वर्ष भारी बरसात के चलते यात्रियों को कई दिनों तक गुंजी, पिथौरागढ़ और अन्य जगहों पर रुकना पड़ा। धारचूला के नजंग और उससे आगे रास्ता खराब होने से केएमवीएन की ओर से यात्रियों को हेलीकाप्टर की सुविधा मुहैया कराई गई थी।
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आईटीबीपी बरेली क्षेत्र के डीआईजी आनंद पाल सिंह निंबाडिया ने व्यास घाटी बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग के तौर पर दारमा वैली से यात्रा कराने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यदि व्यास घाटी के रास्ते खुले होते हैं तो वापसी में यात्रियों को दारमा घाटी के रास्ते वापस लाया जाए। इससे यात्री छोटा कैलास के भी दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने मौसम या रास्ते खराब होने की स्थिति में हेलीकाप्टर सेवा धारचूला से बूंदी और गुंजी लाया जा सकता है। प्रशासन का प्रस्ताव था कि यात्रा सीजन में बारिश अधिक तो यात्रियों की संख्या कम कर 15 अगस्त के बाद यह संख्या बढ़ाई जा सकती है। बीआरओ ने भरोसा दिलाया है कि यात्रा से पूर्व व्यास घाटी में मार्गों को खोल दिया जाएगा। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने सिरखा स्थित टीआरसी की खस्ताहाल स्थिति को देखते हुए गाला के रास्ते यात्रा का प्रस्ताव रखा।
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दारमा घाटी से प्रस्तावित कैलास यात्रा मार्ग
पिथौरागढ़। आईटीबीपी की ओर से प्रस्तावित दारमा घाटी से कैलास मानसरोवर यात्रा का पैदल मार्ग महज 42 किमी होगा। इस मार्ग में यात्री वाहनों के जरिए धारचूला से सोबला, दर, दुग्तु, दांतू, सौन होते हुए बालिंग पहुंचेंगे। बालिंग में रात्रि विश्राम कर वाहन से चार किमी की आगे की यात्रा करेंगे। इसके बाद 10 किमी की दूरी तय कर वेदांग (12500 फीट) पहुंचेंगे। यहां यात्रियों को उच्च हिमालयी क्षेत्र के अनुकूल खुद को ढालने के लिए दो दिन का विश्राम दिया जाएगा। उसके बाद वेदांग से यात्री नौ किमी की कठिन चढ़ाई पार कर सेलापास पहुंचेंगे। सेलापास से ज्योलिंगकांग, कुटी होते हुए गुंजी पहुंचेंगे। दारमा घाटी से महज पांच दिन में पैदल यात्रा पूरी हो जाएगा।