{"_id":"5ac8fdb14f1c1b051d8b5308","slug":"141523121585-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्थानांतरण नीति पर भड़के अभियंता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्थानांतरण नीति पर भड़के अभियंता
Updated Sat, 07 Apr 2018 10:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धारचूला (पिथौरागढ़)। स्थानांतरण नीति पर लोक निर्माण विभाग एवं पीएमजीएसवाई के अभियंता भड़क उठे हैं। उन्होंने तीन वर्ष के बाद आवश्यक स्थानांतरण की मांग की है।
शनिवार को डाक बंगले में विभाग की बैठक में सरकार की सुगम-दुर्गम स्थानांतरण नीति पर नाराजगी जताई। वक्ताओं ने कहा कि कुमाऊं के सल्ट, रानीखेत, चंपावत आदि के रेलवे स्टेशन से मात्र 50 से 80 किमी दूरी पर स्थित क्षेत्रों को दुर्गम की दूरी पर रखना गलत है। अल्मोड़ा के कई इलाकों को दुर्गम में रखने का प्रयास किया जा रहा है, जो मोटर मार्ग से करीब है, जबकि चीन सीमा पर स्थित धारचूला मुनस्यारी के कई क्षेत्र सुविधाओं से महरूम हैं।
कहा कि यदि नीति में पारदर्शिता नहीं अपनाई गई तो ईमानदार कर्मचारी सालों तक दुर्गम में ही फंस जाएंगे। इसके चलते कोई भी धारचूला या मुनस्यारी आने से बचेगा। इस दौरान गोविंद जनौटी, जीके पांडे, किशन ऐरी, कैलाश चंद्र, महेश्वर राम, ललित मोहन तिवाड़ी, विवेक सिंह, जाबिर अली, तसलीम अहमद आदि थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
शनिवार को डाक बंगले में विभाग की बैठक में सरकार की सुगम-दुर्गम स्थानांतरण नीति पर नाराजगी जताई। वक्ताओं ने कहा कि कुमाऊं के सल्ट, रानीखेत, चंपावत आदि के रेलवे स्टेशन से मात्र 50 से 80 किमी दूरी पर स्थित क्षेत्रों को दुर्गम की दूरी पर रखना गलत है। अल्मोड़ा के कई इलाकों को दुर्गम में रखने का प्रयास किया जा रहा है, जो मोटर मार्ग से करीब है, जबकि चीन सीमा पर स्थित धारचूला मुनस्यारी के कई क्षेत्र सुविधाओं से महरूम हैं।
विज्ञापन
कहा कि यदि नीति में पारदर्शिता नहीं अपनाई गई तो ईमानदार कर्मचारी सालों तक दुर्गम में ही फंस जाएंगे। इसके चलते कोई भी धारचूला या मुनस्यारी आने से बचेगा। इस दौरान गोविंद जनौटी, जीके पांडे, किशन ऐरी, कैलाश चंद्र, महेश्वर राम, ललित मोहन तिवाड़ी, विवेक सिंह, जाबिर अली, तसलीम अहमद आदि थे।
विज्ञापन