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तीन माह बाद मिला कस्टम शुल्क जमा करने का नोटिस
Updated Sat, 03 Feb 2018 10:40 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शामिल होने वाले व्यापारियों को कस्टम विभाग ने व्यापार समाप्त होने के तीन माह बाद शुल्क जमा करने नोटिस भेजा है, जबकि यह सभी सामग्री पहले कस्टम शुल्क से मुक्त रखी गई थी। कस्टम शुल्क वसूली का नोटिस मिलने से व्यापारी खासे नाराज हैं। उन्होंने एसडीएम के माध्यम से केंद्रीय वाणिज्य मंत्री को ज्ञापन भेजा है। जीएसटी लगने के बाद कस्टम विभाग ने यह कदम उठाया है।
भारत-तिब्बत व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली ने बताया कि 1962 में भारत-चीन युद्ध के कारण बंद हुआ यह व्यापार तीस वर्ष बाद वर्ष 1992 में जब दोबारा शुरू हुआ तो सीमांत के व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के लिए 29 सामग्रियों को कस्टम शुल्क से मुक्त रखा गया था।
इसमें आयात की जाने वाली सामग्रियों में ऊन, पसम, याक की पूंछ, बकरी की खाल, तिब्बती चाय, याक, बकरियां, सुहागा, नमक, कंबल, चीनी रेशम आदि प्रमुख थे तथा निर्यात किए जाने वाला सामग्रियों में कृषि सामग्री, कंबल, कपड़े, तांबे के बर्तन, चाय, कॉफी, चावल, आटा, सूखे मेवे, सब्जियां, गुड़, मिश्री, फल, स्थानीय उत्पाद, मिट्टी का तेल, बिस्कुट, सुरती आदि प्रमुख थी।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के व्यापार की समाप्ति के तीन महीने बाद कस्टम विभाग ने वसूली का नोटिस जारी कर दिया है। भारत-तिब्बत व्यापार समिति के सदस्य दिनेश गुंज्याल ने कहा कि इस वर्ष कस्टम विभाग के अधिकारी व्यापार समाप्ति से पहले ही गुंजी मंडी से चले आए थे। इस कारण व्यापारी काफी समय तक गुंजी में असमंजस की स्थिति में ही रहे। अब व्यापारी वर्ष 2018 के व्यापार की तैयारियां कर रहे हैं, ऐसे में कस्टम विभाग का यह नोटिस व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।
इस मामले में एसडीएम आरके पांडे ने कहा कि वह डीएम को इस मामले की जानकारी देंगे। साथ ही कस्टम विभाग के अधिकारियों से भी बात की जाएगी। ज्ञापन देने वालों में समिति संरक्षक पद्म सिंह रायपा, विशन गर्ब्याल, राजेंद्र रायपा, चक्र सिंह गर्ब्याल, दौलत रायपा, रतन रायपा, लक्ष्मण सिंह, जगदीश गर्ब्याल, प्रभात आदि व्यापारी शामिल थे। गुंजी में ड्यूटी देने वाले कस्टम के अधिकारी व्यापार अवधि में बरेली से गुंजी आते हैं। इस समय यहां पर कस्टम विभाग का कोई अधिकारी तैनात नहीं है।
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भारत-तिब्बत व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली ने बताया कि 1962 में भारत-चीन युद्ध के कारण बंद हुआ यह व्यापार तीस वर्ष बाद वर्ष 1992 में जब दोबारा शुरू हुआ तो सीमांत के व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के लिए 29 सामग्रियों को कस्टम शुल्क से मुक्त रखा गया था।
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इसमें आयात की जाने वाली सामग्रियों में ऊन, पसम, याक की पूंछ, बकरी की खाल, तिब्बती चाय, याक, बकरियां, सुहागा, नमक, कंबल, चीनी रेशम आदि प्रमुख थे तथा निर्यात किए जाने वाला सामग्रियों में कृषि सामग्री, कंबल, कपड़े, तांबे के बर्तन, चाय, कॉफी, चावल, आटा, सूखे मेवे, सब्जियां, गुड़, मिश्री, फल, स्थानीय उत्पाद, मिट्टी का तेल, बिस्कुट, सुरती आदि प्रमुख थी।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के व्यापार की समाप्ति के तीन महीने बाद कस्टम विभाग ने वसूली का नोटिस जारी कर दिया है। भारत-तिब्बत व्यापार समिति के सदस्य दिनेश गुंज्याल ने कहा कि इस वर्ष कस्टम विभाग के अधिकारी व्यापार समाप्ति से पहले ही गुंजी मंडी से चले आए थे। इस कारण व्यापारी काफी समय तक गुंजी में असमंजस की स्थिति में ही रहे। अब व्यापारी वर्ष 2018 के व्यापार की तैयारियां कर रहे हैं, ऐसे में कस्टम विभाग का यह नोटिस व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।
इस मामले में एसडीएम आरके पांडे ने कहा कि वह डीएम को इस मामले की जानकारी देंगे। साथ ही कस्टम विभाग के अधिकारियों से भी बात की जाएगी। ज्ञापन देने वालों में समिति संरक्षक पद्म सिंह रायपा, विशन गर्ब्याल, राजेंद्र रायपा, चक्र सिंह गर्ब्याल, दौलत रायपा, रतन रायपा, लक्ष्मण सिंह, जगदीश गर्ब्याल, प्रभात आदि व्यापारी शामिल थे। गुंजी में ड्यूटी देने वाले कस्टम के अधिकारी व्यापार अवधि में बरेली से गुंजी आते हैं। इस समय यहां पर कस्टम विभाग का कोई अधिकारी तैनात नहीं है।