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रिपीट-12 वर्षों में भी पूरा नहीं हो पाया बारात घर का सपना
Updated Tue, 12 Jun 2018 11:28 PM IST
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पिथौरागढ़। नगर के भाटकोट में पिछले 12 वर्षों से बन रहा कम्यूनिटी हॉल एवं बारात घर का कार्य बजट के अभाव में अटका है। हालांकि, नगर पालिका प्रशासन की ओर से शासन से धन की मांग की गई है, लेकिन अब तक यह जारी नहीं हुआ है।
पूर्व में भाजपा शासनकाल में पालिका ने भाटकोट वार्ड में करीब छह नाली भूमि पर समाज के कमजोर वर्ग के लिए कम्यूनिटी हॉल एवं बारात घर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा। वर्ष 2006 में इसके लिए 275 लाख रुपये स्वीकृत हुए। इसमें से पहली किश्त के रूप में पालिका को 160.49 लाख रुपये जारी हुए। पालिका ने लोनिवि को कार्य सौंपा। लोनिवि ने कुछ समय तो तेजी से कार्य किया, लेकिन बाद में हाथ खड़े कर दिए।
मार्च 2012 में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष राजेंद्र सिंह रावत ने लोनिवि के पास बची 60 लाख रुपये की धनराशि को वापस मांगकर पालिका के जरिये कार्य शुरू कराया। उक्त धनराशि खत्म होने के बाद बारात घर का काम रुक गया। पालिका को 114.51 लाख रुपये की दूसरी किश्त नहीं मिल पाई। पूर्व पालिकाध्यक्ष रावत ने बताया कि बारात घर का प्रस्ताव गरीबों की दिक्कतों को देखते हुए बनाया गया था। इसमें एक बड़ा हॉल और 10 कमरों के साथ ही छत पर पार्किंग बनाई जानी थी। गरीबों को न्यूनतम पांच हजार रुपये शुल्क में इसे उपलब्ध कराया जाना था।
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निवर्तमान पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती का कहना है कि लोनिवि से धन क्यों वापस मंगाया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। धन की कमी के चलते बारात घर का फिनिशिंग कार्य पूरा नहीं हो पाया। भाजपा और कांग्रेस शासनकाल में भी गरीबों को सस्ते में सुविधा दिलाने का सपना पूरा नहीं हो पाया। बजट के अभाव में बारात घर खंडहर बना हुआ है। यदि समय पर पालिका को बजट मिल जाता तो बारात घर का फायदा जरूरतमंदों को मिल पाता।
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पूर्व में भाजपा शासनकाल में पालिका ने भाटकोट वार्ड में करीब छह नाली भूमि पर समाज के कमजोर वर्ग के लिए कम्यूनिटी हॉल एवं बारात घर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा। वर्ष 2006 में इसके लिए 275 लाख रुपये स्वीकृत हुए। इसमें से पहली किश्त के रूप में पालिका को 160.49 लाख रुपये जारी हुए। पालिका ने लोनिवि को कार्य सौंपा। लोनिवि ने कुछ समय तो तेजी से कार्य किया, लेकिन बाद में हाथ खड़े कर दिए।
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मार्च 2012 में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष राजेंद्र सिंह रावत ने लोनिवि के पास बची 60 लाख रुपये की धनराशि को वापस मांगकर पालिका के जरिये कार्य शुरू कराया। उक्त धनराशि खत्म होने के बाद बारात घर का काम रुक गया। पालिका को 114.51 लाख रुपये की दूसरी किश्त नहीं मिल पाई। पूर्व पालिकाध्यक्ष रावत ने बताया कि बारात घर का प्रस्ताव गरीबों की दिक्कतों को देखते हुए बनाया गया था। इसमें एक बड़ा हॉल और 10 कमरों के साथ ही छत पर पार्किंग बनाई जानी थी। गरीबों को न्यूनतम पांच हजार रुपये शुल्क में इसे उपलब्ध कराया जाना था।
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निवर्तमान पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती का कहना है कि लोनिवि से धन क्यों वापस मंगाया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। धन की कमी के चलते बारात घर का फिनिशिंग कार्य पूरा नहीं हो पाया। भाजपा और कांग्रेस शासनकाल में भी गरीबों को सस्ते में सुविधा दिलाने का सपना पूरा नहीं हो पाया। बजट के अभाव में बारात घर खंडहर बना हुआ है। यदि समय पर पालिका को बजट मिल जाता तो बारात घर का फायदा जरूरतमंदों को मिल पाता।