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क्या लंबे समय तक चल पाएगी वन-वे व्यवस्था
Updated Sun, 03 Dec 2017 10:05 PM IST
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पिथौरागढ़। नगर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर जाने के बाद अब पुलिस कुछ मुख्य मार्गों पर वन-वे व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक चल पाएगी, इसमें संदेह है।
पहले भी कई बार वन-वे व्यवस्था लागू हुई थी पर जन दबाव के कारण इस निर्णय को वापस लेना पड़ा था। वैसे पुलिस का तर्क है कि इस समय शादी का सीजन होने और डिग्री कॉलेज जाने वाली सड़क पर पांडेगांव पुल का नए सिरे से निर्माण होने के कारण यह व्यवस्था लागू करनी पड़ी है। यह व्यवस्था कितने दिन तक चलेगी, इसकी कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।
पुलिस ने वन-वे व्यवस्था के लिए जो निर्धारण किया है, उसमें बैंक रोड को मुख्य रूप से चिन्हित किया गया है। बैंक रोड पर ही जिला अस्पताल है और इसी रोड से महिला अस्पताल के लिए भी मरीज जाते हैं। 108 आपात वाहन और खुशियों की सवारी के लिए समय-समय पर मार्ग खोलना पड़ेगा।
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क्योंकि इन वाहनों को वन-वे व्यवस्था के दायरे से बाहर रखा गया है। सीओ शेखर सुयाल का कहना है कि वन-वे व्यवस्था लागू होने पर स्थिति नियंत्रण में आएगी। इधर, नगर के लोगों का कहना है कि पहले भी पुलिस ने यातायात व्यवस्था के लिए कई प्रयोग किए थे।
उदाहरण के तौर पर घंटाकरण से सिल्थाम की तरफ बड़े वाहनों के जाने पर पाबंदी लगाई गई थी, लेकिन एक महीने बाद ही इस व्यवस्था को वापस लेना पड़ा।
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पहले भी कई बार वन-वे व्यवस्था लागू हुई थी पर जन दबाव के कारण इस निर्णय को वापस लेना पड़ा था। वैसे पुलिस का तर्क है कि इस समय शादी का सीजन होने और डिग्री कॉलेज जाने वाली सड़क पर पांडेगांव पुल का नए सिरे से निर्माण होने के कारण यह व्यवस्था लागू करनी पड़ी है। यह व्यवस्था कितने दिन तक चलेगी, इसकी कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।
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पुलिस ने वन-वे व्यवस्था के लिए जो निर्धारण किया है, उसमें बैंक रोड को मुख्य रूप से चिन्हित किया गया है। बैंक रोड पर ही जिला अस्पताल है और इसी रोड से महिला अस्पताल के लिए भी मरीज जाते हैं। 108 आपात वाहन और खुशियों की सवारी के लिए समय-समय पर मार्ग खोलना पड़ेगा।
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क्योंकि इन वाहनों को वन-वे व्यवस्था के दायरे से बाहर रखा गया है। सीओ शेखर सुयाल का कहना है कि वन-वे व्यवस्था लागू होने पर स्थिति नियंत्रण में आएगी। इधर, नगर के लोगों का कहना है कि पहले भी पुलिस ने यातायात व्यवस्था के लिए कई प्रयोग किए थे।
उदाहरण के तौर पर घंटाकरण से सिल्थाम की तरफ बड़े वाहनों के जाने पर पाबंदी लगाई गई थी, लेकिन एक महीने बाद ही इस व्यवस्था को वापस लेना पड़ा।