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गेहूं का बीज 36 रुपये किलो खरीदा, ढंग से उगा नहीं
Updated Mon, 08 Jan 2018 11:18 PM IST
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पिथौरागढ़ जिले में सभी जगह सूखे की विकराल होती स्थिति से किसान परेशान हैं। इस बार किसानों ने कृषि विभाग के माध्यम से 36 रुपये किलो के हिसाब से गेहूं का जो बीज खरीदकर बोया था, वह ढंग से उगा ही नहीं है। करीब 28 फीसदी हिस्से में गेहूं के बीज अंकुरित नहीं हो पाए हैं। जहां पर बीज अंकुरित हुए हैं वह पानी के अभाव में सूखने लगे हैं। जिले में मात्र दस फीसदी खेतों तक ही सिंचाई की सुविधा है। 90 फीसदी खेत वर्षा के पानी पर निर्भर रहते हैं। गेहूं की फसल की अब निराई का समय आ रहा है लेकिन पौधों की ऊंचाई पांच सेमी से ज्यादा नहीं है। यही हाल मसूर और चना का भी है। मसूर की फसल लगभग चौपट होने वाली है।
जिले में सितंबर के बाद बारिश का क्रम थम गया था। नवंबर में सिर्फ एक दिन आंशिक रूप से बारिश हुई लेकिन उससे खेतों को कोई फायदा नहीं हुआ। दिसंबर अंत में अक्सर बारिश, बर्फबारी की संभावना बन जाती थी लेकिन इस बार ऐसे कोई लक्षण सामने नहीं आए। जल्द बारिश की उम्मीद भी नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों ने मौसम की प्रतिकूल स्थिति पर चिंता जताई है। कहा है कि बारिश न होने से जमीन की नमी कम हो रही है। पाले का असर ज्यादा हो रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने कहा कि फसलों पर 35 से 40 फीसदी का असर पड़ गया है। यदि एक सप्ताह के भीतर बारिश हो जाती है तो गेहूं की फसल का कुछ अंश किसानों को मिल सकता है। अन्यथा किसान संकट में रहेंगे। मोस्टामानू के प्रगतिशील किसान इकबाल अहमद ने बताया कि मौसम की ऐसी विचित्र स्थिति पहली बार देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि चंडाक, मोस्टामानू, छेड़ा, दिगतोली, नाकोट समेत पूरी गोरंगघाटी में किसान मासूस हैं। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों में पर्याप्त राशन भेजा जाए।
किसानों ने 36 रुपये किलो की दर से बीज खरीदा था
पिथौरागढ़ जिले में सभी जगह सूखे की मार
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जिले में सितंबर के बाद बारिश का क्रम थम गया था। नवंबर में सिर्फ एक दिन आंशिक रूप से बारिश हुई लेकिन उससे खेतों को कोई फायदा नहीं हुआ। दिसंबर अंत में अक्सर बारिश, बर्फबारी की संभावना बन जाती थी लेकिन इस बार ऐसे कोई लक्षण सामने नहीं आए। जल्द बारिश की उम्मीद भी नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों ने मौसम की प्रतिकूल स्थिति पर चिंता जताई है। कहा है कि बारिश न होने से जमीन की नमी कम हो रही है। पाले का असर ज्यादा हो रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने कहा कि फसलों पर 35 से 40 फीसदी का असर पड़ गया है। यदि एक सप्ताह के भीतर बारिश हो जाती है तो गेहूं की फसल का कुछ अंश किसानों को मिल सकता है। अन्यथा किसान संकट में रहेंगे। मोस्टामानू के प्रगतिशील किसान इकबाल अहमद ने बताया कि मौसम की ऐसी विचित्र स्थिति पहली बार देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि चंडाक, मोस्टामानू, छेड़ा, दिगतोली, नाकोट समेत पूरी गोरंगघाटी में किसान मासूस हैं। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों में पर्याप्त राशन भेजा जाए।
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किसानों ने 36 रुपये किलो की दर से बीज खरीदा था
पिथौरागढ़ जिले में सभी जगह सूखे की मार