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पर्यावरम संबंधी कानून पर ऑनलाइन वर्कशाप का ई-उद्घाटन
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जम्मू। वन, वन्य जीव और पर्यावरण संबंधी कानून के विषय पर तीन दिवसीय ऑनलाइन वर्कशाप आयोजित की गई। जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी और जम्मू-कश्मीर वन विभाग द्वारा आयोजित वर्कशाप का चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने वीरवार को ई-उद्घाटन किया। इस ऑनलाइन वर्कशॉप से वन विभाग के अधिकारियों सहित देश भर के वन और पर्यावरण कानूनों के विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं।
न्यायिक अधिकारियों, तेलंगाना के प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सरकारी वकीलों और कानून अधिकारियों के लिए जम्मू-कश्मीर की न्यायिक अकादमी के सहयोग से ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर समृद्ध जैव विविधता से संपन्न है जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने प्राकृतिक संपदा के संरक्षण में वन विभाग के प्रयासों की सराहना भी की। पर्यावरण और जैव विविधता पर बुनियादी मुद्दों को संबोधित करने वाले ऐसे और कार्यक्रमों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। डॉ. मोहित गेरा ने वन, वन्यजीव और पर्यावरण क्षेत्र का अवलोकन किया और कहा कि जंगल और पर्यावरण के संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका बड़े स्तर पर रही है। डॉ. गेरा ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए कई ऐतिहासिक निर्णयों के उदाहरण भी दिए।
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न्यायिक अधिकारियों, तेलंगाना के प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सरकारी वकीलों और कानून अधिकारियों के लिए जम्मू-कश्मीर की न्यायिक अकादमी के सहयोग से ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
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चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर समृद्ध जैव विविधता से संपन्न है जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने प्राकृतिक संपदा के संरक्षण में वन विभाग के प्रयासों की सराहना भी की। पर्यावरण और जैव विविधता पर बुनियादी मुद्दों को संबोधित करने वाले ऐसे और कार्यक्रमों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। डॉ. मोहित गेरा ने वन, वन्यजीव और पर्यावरण क्षेत्र का अवलोकन किया और कहा कि जंगल और पर्यावरण के संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका बड़े स्तर पर रही है। डॉ. गेरा ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए कई ऐतिहासिक निर्णयों के उदाहरण भी दिए।
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