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आरवीएनएल व लोनिवि के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
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विकास खंड कोट के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले बिल्वकेदार, देलचौरी और जनासू तथा खंदूखाल कांडी खस्ताहाल मोटर मार्ग को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों ने लोनिवि और रेल विकास निगम के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। साथ ही रेल परियोजना के निर्माण कार्यों में लगे वाहनों की आवाजाही बंदी की। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना के निर्माण कार्यों में लगे वाहनों से पूरा मार्ग क्षतिग्रस्त हुआ है। ग्रामीणों ने 25 अप्रैल तक मार्ग पर पेंटिंग और नाली निर्माण की कार्रवाई शुरू न किए जाने पर अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।
रविवार को वैद्यगांव, बिल्वकेदार, नकोट, धनचढ़ा, जनासू आदि गांवों के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने बिल्वकेदार पुल पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मार्ग पर रेल परियोजना के निर्माण कार्यों में लगे वाहनों की आवाजाही बंद कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि मार्ग पर रेल परियोजना के निर्माण कार्यों में लगे भारी वाहनों की आवाजाही से पूरा मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। मोटर मार्ग के किनारे पानी की निकासी के लिए बनी नाली भी टूट चुकी है। आरवीएनएल की ओर से मार्ग पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। इससे सड़क पर बने गड्ढों में पानी जमा होने से कीचड़ फैल रहा है। समस्या के समाधान के लिए कई बार आरवीएनएल के अधिकारियों, लोनिवि व कार्यदायी एजेंसी से गुहार लगाई गई, लेकिन किसी ने आज तक समस्या को गंभीरता से नहीं लिया है।
धरने पर बैठे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने निर्णय लिया कि 18 अप्रैल तक सांकेतिक धरना जारी रखा जाएगा। इसके बाद अगर 25 अप्रैल तक मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आरवीएनएल और कार्यदायी एजेंसी के वाहनों की आवाजाही पूर्णरूप से बंद कर अनशन शुरू किया जाएगा। जिसमें हरीश उनियाल, आनंदमणी भट्ट और गजपाल सिंह रावत अनशन पर बैठेेंगे।
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आंदोलन को जारी रखने के लिए जन संघर्ष समिति का भी गठन किया गया, जिसमें प्रधान ज्योति देवी, पुष्पा उनियाल और राजेश्वरी देवी को संरक्षक, संदीप रावत अध्यक्ष, शांतिलाल लिंगवाल वरिष्ठ उपाध्यक्ष, कविता लिंगवाल उपाध्यक्ष, आनंदमणी सचिव और विपेंद्र बिष्ट को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। प्रदर्शनकारियों में सरोजनी देवी, शशि भट्ट, विजेश्वरी, बिमला, सुरेंद्र सिंह भंडारी, गजपाल रावत, लक्ष्मण नेगी, उत्तम कोली, धर्मवीर बुटोला, भागचंद, तेजपाल गुसांई, विरेंद्र व विक्रम सिंह आदि शामिल थे।
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रविवार को वैद्यगांव, बिल्वकेदार, नकोट, धनचढ़ा, जनासू आदि गांवों के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने बिल्वकेदार पुल पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मार्ग पर रेल परियोजना के निर्माण कार्यों में लगे वाहनों की आवाजाही बंद कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि मार्ग पर रेल परियोजना के निर्माण कार्यों में लगे भारी वाहनों की आवाजाही से पूरा मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। मोटर मार्ग के किनारे पानी की निकासी के लिए बनी नाली भी टूट चुकी है। आरवीएनएल की ओर से मार्ग पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। इससे सड़क पर बने गड्ढों में पानी जमा होने से कीचड़ फैल रहा है। समस्या के समाधान के लिए कई बार आरवीएनएल के अधिकारियों, लोनिवि व कार्यदायी एजेंसी से गुहार लगाई गई, लेकिन किसी ने आज तक समस्या को गंभीरता से नहीं लिया है।
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धरने पर बैठे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने निर्णय लिया कि 18 अप्रैल तक सांकेतिक धरना जारी रखा जाएगा। इसके बाद अगर 25 अप्रैल तक मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आरवीएनएल और कार्यदायी एजेंसी के वाहनों की आवाजाही पूर्णरूप से बंद कर अनशन शुरू किया जाएगा। जिसमें हरीश उनियाल, आनंदमणी भट्ट और गजपाल सिंह रावत अनशन पर बैठेेंगे।
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आंदोलन को जारी रखने के लिए जन संघर्ष समिति का भी गठन किया गया, जिसमें प्रधान ज्योति देवी, पुष्पा उनियाल और राजेश्वरी देवी को संरक्षक, संदीप रावत अध्यक्ष, शांतिलाल लिंगवाल वरिष्ठ उपाध्यक्ष, कविता लिंगवाल उपाध्यक्ष, आनंदमणी सचिव और विपेंद्र बिष्ट को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। प्रदर्शनकारियों में सरोजनी देवी, शशि भट्ट, विजेश्वरी, बिमला, सुरेंद्र सिंह भंडारी, गजपाल रावत, लक्ष्मण नेगी, उत्तम कोली, धर्मवीर बुटोला, भागचंद, तेजपाल गुसांई, विरेंद्र व विक्रम सिंह आदि शामिल थे।