{"_id":"591341074f1c1b2d3f850be1","slug":"vanworker-s-photo-is-necessary-with-dead-cattle","type":"story","status":"publish","title_hn":"मृत मवेशी के साथ वनकर्मी की फोटो जरूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मृत मवेशी के साथ वनकर्मी की फोटो जरूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, पौड़ी
Updated Wed, 10 May 2017 10:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मवेशियों के मुआवजे को लेकर बढ़ रहे फर्जी केसों को देखते हुए अब वन विभाग मृत मवेशी के साथ वन कर्मचारी की फोटो होने पर मुआवजा देगा। विभाग ने ऐसे कई केसों को खारिज कर दिया है, जिन्होंने मुआवजे के आवेदनपत्र के साथ मृत मवेशी और वन कर्मी की फोटो नहीं लगाई।
विज्ञापन
प्राय: देखने में आता है कि लोग मृत मवेशियों के फर्जी केस बना लेते हैं। इसे देखते हुए अब विभाग आवेदनकर्ता को मृत मवेशी के साथ वनकर्मी की फोटो होने पर ही मुआवजा राशि देगा। ऐसे ही एक मामले में डांगी गांव की महिला रेखा देवी ने वन मंत्री को पत्र भेजकर मुआवजे की मांग की है। महिला ने बताया कि उनकी दो दुधारु गायों को गुलदार ने मार दिया था। वनकर्मी को सूचित करने के बावजूद वह मौके पर नहीं पहुंचे। वन कर्मचारी ने उसे यह कहकर टाल दिया कि मेडिकल प्रमाणपत्र से ही मुआवजा मिल जाएगा, लेकिन सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उनका आवेदन निरस्त किया गया है।
विज्ञापन
नागदेव रेंज के वन क्षेत्राधिकारी आशीष डिमरी ने बताया कि गुलदार द्वारा मवेशियों को मारने को लेकर मुआवजे लेने के लिए लोग गलत ढंग से केस फाइल कर रहे हैं। इनमें एक खच्चर का केस आया है कि खच्चर की मौत घर पर हुई, लेकिन मालिक ने मृत खच्चर को गदेरे में फेंक दिया और मुआवजे के लिए आवेदन कर दिया।
विज्ञापन
जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि किसी के कहने पर उसने यह आवेदन किया। डिमरी ने बताया कि यदि किसी के मवेशी को गुलदार मारता है तो उसे 24 से 48 घंटे में सूचित करना जरूरी है, लेकिन लोग डॉक्टर की रिपोर्ट बनवाकर मुआवजा लेने की फिराक में रहते हैं।
गुलदार द्वारा मवेशी को मारने पर यह मिलती है राशि :
गाय 15000
घोड़ा/खच्चर 40000
बैल/भैंस 15000
बकरी/भेड़ 3000