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प्रभारी निदेशक के खिलाफ उक्रांद मुखर
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जीबी पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान घुड़दौड़ी का विवादों से पीछा नहीं छूट रहा है। अनियमितताओं के चलते संस्थान के कुलसचिव को पद से हटाया जा चुका है। वहीं संस्थान की जिम्मेदारी चार साल से प्रभारी निदेशक ही संभाल रहे हैं। करीब एक साल प्रभार डीएम के पास भी रहा है। अब एक बार फिर संस्थान के प्रभारी निदेशक पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। उक्रांद ने संस्थान के प्रभारी निदेशक पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाए जाने की मांग की है। वहीं प्रभारी निदेशक ने आरोपों को खारिज करते हुए बेबुनियाद व निराधार बताया है।
मंगलवार को मुख्यालय पौड़ी में उत्तराखंड क्रांति दल के जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन गुसांई के नेतृत्व में उक्रांद कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि प्रो. सिंह के वर्ष 2016 में प्रभारी निदेशक पद पर रहते हुए उन्होंने संस्थान में नियम विरुद्घ वित्तीय, प्रशासनिक व शैक्षणिक अनियमितताएं कीं। जांच में उन्हें दोषी पाया गया। इसके बाद शासन ने उन्हें प्रभारी निदेशक के पद से हटा दिया था। गुसांई ने कहा कि जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रो. सिंह को भविष्य में संस्थान में प्रभारी निदेशक की जिम्मेदारी न दी जाए। साथ ही नियमित निदेशक के पद पर उन्हें चयनित न किया जाय। साथ ही आरोप भी लगाया कि प्रो. सिंह ने संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद पर सेवारत अधिकारी को नियम विरुद्ध, मनमाने तरीके से उप कुलसचिव के पद पर पदोन्नत किया था। हाईकोर्ट ने पदोन्नत पद पर लिए गए उक्त अधिकारी के अधिक वेतन की रिकवरी के आदेश भी दिए हैं। उक्रांद जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में ही प्रो. वाई सिंह ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष रहते हुए एक संविदा शिक्षक को गलत पदोन्नत करते हुए उप कुलसचिव बनाया था। वर्तमान में प्रो. सिंह को एक बार फिर प्रभारी निदेशक की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें तत्काल हटाया जाए। वहीं प्रभारी निदेशक प्रो. वाई सिंह का कहना है कि उनपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद और निराधार हैं। जिस जांच की बात हो रही है, वह आज तक कहीं नहीं है। शैक्षणिक संस्थान को राजनीति का केंद्र बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रो. सिंह ने कहा कि शासन जब चाहे जिम्मेदारी वापस ले सकता है।
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मंगलवार को मुख्यालय पौड़ी में उत्तराखंड क्रांति दल के जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन गुसांई के नेतृत्व में उक्रांद कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि प्रो. सिंह के वर्ष 2016 में प्रभारी निदेशक पद पर रहते हुए उन्होंने संस्थान में नियम विरुद्घ वित्तीय, प्रशासनिक व शैक्षणिक अनियमितताएं कीं। जांच में उन्हें दोषी पाया गया। इसके बाद शासन ने उन्हें प्रभारी निदेशक के पद से हटा दिया था। गुसांई ने कहा कि जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रो. सिंह को भविष्य में संस्थान में प्रभारी निदेशक की जिम्मेदारी न दी जाए। साथ ही नियमित निदेशक के पद पर उन्हें चयनित न किया जाय। साथ ही आरोप भी लगाया कि प्रो. सिंह ने संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद पर सेवारत अधिकारी को नियम विरुद्ध, मनमाने तरीके से उप कुलसचिव के पद पर पदोन्नत किया था। हाईकोर्ट ने पदोन्नत पद पर लिए गए उक्त अधिकारी के अधिक वेतन की रिकवरी के आदेश भी दिए हैं। उक्रांद जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में ही प्रो. वाई सिंह ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष रहते हुए एक संविदा शिक्षक को गलत पदोन्नत करते हुए उप कुलसचिव बनाया था। वर्तमान में प्रो. सिंह को एक बार फिर प्रभारी निदेशक की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें तत्काल हटाया जाए। वहीं प्रभारी निदेशक प्रो. वाई सिंह का कहना है कि उनपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद और निराधार हैं। जिस जांच की बात हो रही है, वह आज तक कहीं नहीं है। शैक्षणिक संस्थान को राजनीति का केंद्र बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रो. सिंह ने कहा कि शासन जब चाहे जिम्मेदारी वापस ले सकता है।
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