{"_id":"5f47e55a8ebc3e3d1946160c","slug":"there-is-a-lot-of-scope-for-improvement-in-health-and-education-in-the-mountain-ramdev-shrinagar-news-drn3543616126","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहाड़ में स्वास्थ्य एवं शिक्षा में सुधार की गुजांइश: रामदेव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहाड़ में स्वास्थ्य एवं शिक्षा में सुधार की गुजांइश: रामदेव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। योगगुरु बाबा रामदेव का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं शिक्षा की स्थितियों को और बेहतर करने की जरूरत है। आधारभूत संसाधन, शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार की बहुत गुंजाइश है।
बाबा रामदेव इन दिनों देवप्रयाग के समीप मूल्यागांव में पतंजलि गुरुकुलम में बच्चों और स्टाफ के साथ दिन बिता रहे हैं। वे 30 अगस्त तक यहीं रहेंगे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति समाज और सरकारों की जागरूकता जितनी होनी चाहिए, उतनी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में 25 से 30 करोड़ कोरोना पॉजिटिव होकर निगेटिव हो चुके हैं। उनके भीतर एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है, जो काम वैक्सीन से होना था, वो काम लोगों की इम्युनिटी से हो रहा है। लोग सेहत पर ध्यान दे रहे हैं। वह प्रणायाम कर रहे हैं। खानपान पर ध्यान दे रहे हैं। यही कारण है कि हिंदुस्तान में रिकवरी रेट सबसे ज्यादा और डेथ रेट सबसे कम है। सर्वे से पता लग रहा है कि हमारी करीब एक चौथाई आबादी ठीक हो चुकी है। उन्हें विश्वास है कि एक दिन कोरोना का पैनिक खत्म हो जाएगा और वैक्सीन की शायद भारत को जरूरत ही न पड़े।
बाबा ने नीट और जेईई का समर्थन किया। कोरोना काल में विकास को बाधित नहीं कर सकते हैं। करियर के लिए जरूरी परीक्षाएं होनी चाहिए। जिंदगी की रफ्तार नहीं थमनी चाहिए। कोरोना से डरे नहीं, इसके साथ जीना सीखना होगा। यह सृष्टि से मिटेगा नहीं। यह हेपिटाइटिस, एचआईवी या टीबी तरह रहेगा। इसलिए लोग अपनी इम्युनिटी बढ़ाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
बाबा रामदेव इन दिनों देवप्रयाग के समीप मूल्यागांव में पतंजलि गुरुकुलम में बच्चों और स्टाफ के साथ दिन बिता रहे हैं। वे 30 अगस्त तक यहीं रहेंगे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति समाज और सरकारों की जागरूकता जितनी होनी चाहिए, उतनी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में 25 से 30 करोड़ कोरोना पॉजिटिव होकर निगेटिव हो चुके हैं। उनके भीतर एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है, जो काम वैक्सीन से होना था, वो काम लोगों की इम्युनिटी से हो रहा है। लोग सेहत पर ध्यान दे रहे हैं। वह प्रणायाम कर रहे हैं। खानपान पर ध्यान दे रहे हैं। यही कारण है कि हिंदुस्तान में रिकवरी रेट सबसे ज्यादा और डेथ रेट सबसे कम है। सर्वे से पता लग रहा है कि हमारी करीब एक चौथाई आबादी ठीक हो चुकी है। उन्हें विश्वास है कि एक दिन कोरोना का पैनिक खत्म हो जाएगा और वैक्सीन की शायद भारत को जरूरत ही न पड़े।
विज्ञापन
बाबा ने नीट और जेईई का समर्थन किया। कोरोना काल में विकास को बाधित नहीं कर सकते हैं। करियर के लिए जरूरी परीक्षाएं होनी चाहिए। जिंदगी की रफ्तार नहीं थमनी चाहिए। कोरोना से डरे नहीं, इसके साथ जीना सीखना होगा। यह सृष्टि से मिटेगा नहीं। यह हेपिटाइटिस, एचआईवी या टीबी तरह रहेगा। इसलिए लोग अपनी इम्युनिटी बढ़ाए।
विज्ञापन