श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के कुलगीत के सृजन की प्रथम बैठक हुई। इस मौके पर कुलपति प्रो. सिंह ने जरूरी दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय की समृद्ध परंपरा को और अधिक सशक्त बनाने के लिए कुलगीत का होना जरूरी है। जिससे छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों और समाज के प्रत्येक वर्ग में नई चेतना जागृत हो सके। कुलगीत संयोजक प्रो. मोहन पवार एवं प्रो. गुड्डी बिष्ट ने कहा कि वरिष्ठ लेखकों एवं शिक्षकों को समिति में रखा गया है, जो पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ कुलगीत के लेखन का कार्य कर रहे हैं। प्रथम बैठक में सभी ने अपना लेखन साझा किया। कुलपति ने सभी सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि श्रीनगर क्षेत्र की भव्यता का वर्णन कुलगीत में होना जरूरी है। लेखन की जिम्मेदारी पूर्व विभाग अध्यक्ष हिंदी प्रो. मृदुला जुगरान, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कवि नीरज नैथानी, वरिष्ठ साहित्यकार सुशील कोटनाला, डॉ. एकता बिष्ट, महेश डोभाल और संगीत एवं गायन की जिम्मेदारी संगीत नाटक अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक एवं संगीतकार डॉ. संजय पांडे को दी गई है। प्रो. गुड्डी बिष्ट ने कहा की सभी लोग अपने-अपने विषय के महारथी हैं, बहुत जल्द कुलगीत को तैयार कर प्रस्तुत किया जाएगा।