{"_id":"6a6f2b8bdc1910a3aa089570","slug":"teacher-hard-work-transforms-barren-land-into-apple-and-kiwi-orchard-pauri-news-c-51-1-pri1002-115258-2026-08-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pauri News: शिक्षक की मेहनत से बंजर जमीन बनीं सेब- कीवी की बागवानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pauri News: शिक्षक की मेहनत से बंजर जमीन बनीं सेब- कीवी की बागवानी
Sun, 02 Aug 2026 05:05 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sun, 02 Aug 2026 05:05 PM IST
विज्ञापन
पौड़ी/थलीसैंण। पलायन और सीमित रोजगार की चुनौतियों के बीच जनपद में बागवानी मॉडल आजीविका का नया विकल्प बनता जा रहा है। विकासखंड थलीसैंण के सुकई (बंज्वाड़) गांव के दीनदयाल बिष्ट ने इसकी मिसाल पेश की है।
राइंका बैजरो में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता दीनदयाल बिष्ट ने कोविड काल में अपने गांव की बंजर भूमि पर बागवानी का संकल्प लिया और वैज्ञानिक तरीके से सेब व कीवी की बागवानी शुरू की। शिक्षक के छोटे प्रयास से आज उनकी बागवानी दूसरों के लिए भी मिसाल बन गई है।
बिष्ट बताते हैं कि मनरेगा, उद्यान व कृषि विभाग की योजनाओं के जरिये बगीचे की शुरुआत घेरबाड़, जियोटैंक व हाइड्रो प्रोजेक्ट पाइपलाइन के जरिये की। पौध चयन, पौधरोपण, रखरखाव और वैज्ञानिक प्रबंधन की तकनीकी मार्गदर्शन से सेब और कीवी की फसल अब लहलहाने लगी है।बताया कि बागवानी से हर सीजन में करीब 3 से 4 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
विज्ञापन
डीएचओ मनोरंजन भंडारी ने बताया कि जनपद में सेब, कीवी समेत उच्च मूल्य वाली फल बागवानी के लिए काश्तकारों को जानकारी व सहायता मुहैया कराई जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु इन फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल है। किसान वैज्ञानिक तकनीकों से कम जगह पर भी बेहतर उत्पादन कर सकते हैं।
विज्ञापन
राइंका बैजरो में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता दीनदयाल बिष्ट ने कोविड काल में अपने गांव की बंजर भूमि पर बागवानी का संकल्प लिया और वैज्ञानिक तरीके से सेब व कीवी की बागवानी शुरू की। शिक्षक के छोटे प्रयास से आज उनकी बागवानी दूसरों के लिए भी मिसाल बन गई है।
विज्ञापन
बिष्ट बताते हैं कि मनरेगा, उद्यान व कृषि विभाग की योजनाओं के जरिये बगीचे की शुरुआत घेरबाड़, जियोटैंक व हाइड्रो प्रोजेक्ट पाइपलाइन के जरिये की। पौध चयन, पौधरोपण, रखरखाव और वैज्ञानिक प्रबंधन की तकनीकी मार्गदर्शन से सेब और कीवी की फसल अब लहलहाने लगी है।बताया कि बागवानी से हर सीजन में करीब 3 से 4 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
विज्ञापन
डीएचओ मनोरंजन भंडारी ने बताया कि जनपद में सेब, कीवी समेत उच्च मूल्य वाली फल बागवानी के लिए काश्तकारों को जानकारी व सहायता मुहैया कराई जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु इन फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल है। किसान वैज्ञानिक तकनीकों से कम जगह पर भी बेहतर उत्पादन कर सकते हैं।