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दीपावली से पूर्व, दीपावली और दीपावली के बाद की स्थिति बताएंगे वैज्ञानिक
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श्रीनगर मे दीपावली के त्यौहार पर जम कर हुयी आतिशबाजी
- फोटो : SHRINAGAR
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आईआईटीएम (भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान) विभाग, एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि श्रीनगर और दून विश्वविद्यालय देहरादून की संयुक्त टीम दीपावली के दौरान पटाखों-आतिशबाजी से वायु की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर रही है। वैज्ञानिकों की टीम यह देखेगी कि दीपावली से पूर्व, दीपावली और इसके बाद श्रीनगर क्षेत्र में वायु में प्रदूषित तत्वों की मात्रा क्या रही? वैज्ञानिकों के अनुसार, यह रिपोर्ट सरकार को प्रेषित की जाएगी। ताकि एअर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) में इसे शामिल किया जा सके।
गढ़वाल विवि का ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग और भौतिकी विभाग वर्ष 2015 से दीपावली के दौरान वायु प्रदूषण आकलन करते आए हैं। इसके लिए हाई वॉल्यूम सेंपलर के जरिए वातावरण में मौजूद कणों के नमूने लिए जाते हैं। इस बार अध्ययन क्षेत्र को और विस्तार दिया गया है। अब इसमें आईआईटीएम और दून विश्वविद्यालय को शामिल किया गया है। वातावरण में मौजूद सूक्ष्म से सूक्ष्म कणों के सेंपल लेने के लिए उपकरण लगाए गए हैं।
टीम के सदस्य और भौतिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. आलोक सागर गौतम ने बताया कि उपकरणों ने 23 अक्तूबर से नमूने लेने शुरू कर दिए हैं। दीपावली के बाद 30 अक्तूबर तक नमूने लिए जाएंगे। उपकरणों से मिले नमूनों के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि इस दौरान किसी तत्व की मात्रा बढ़ी और किसकी घटी।
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यह है टीम में शामिल
डा. अभिलाष पारिकर, डा. दीवान बिष्ट व डा.संदीप (आईआईटीएम पुणे), डा. विजय श्रीधर व मंयक गैरोला (दून विवि देहरादून), डा. आरएस नेगी (विभागाध्यक्ष ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग गढ़वाल विवि) और डा. आलोक सागर गौतम, संजीव कुमार, निधि गैरोला व अजय कुमार (भौतिकी विभाग, गढ़वाल विवि)
यह है उपकरण
हाई वॉल्यूम सेंपलर- 2.5 से 10 माइक्रोमीटर के कणों को एकत्रित करने वाला उपकरण।
एथेलोमीटर- 50 नैनोमीटर से ऊपर के कणों के नमूने लेने वाला उपकरण
ग्रीम-50 नैनोमीटर से नीचे के कणों के नमूने लेने वाला उपकरण।
एसओटू गैस एनालाइजर- वातावरण में सल्फर डाई ऑक्साइड गैस का पता लगाने वाला उपकरण।
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गढ़वाल विवि का ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग और भौतिकी विभाग वर्ष 2015 से दीपावली के दौरान वायु प्रदूषण आकलन करते आए हैं। इसके लिए हाई वॉल्यूम सेंपलर के जरिए वातावरण में मौजूद कणों के नमूने लिए जाते हैं। इस बार अध्ययन क्षेत्र को और विस्तार दिया गया है। अब इसमें आईआईटीएम और दून विश्वविद्यालय को शामिल किया गया है। वातावरण में मौजूद सूक्ष्म से सूक्ष्म कणों के सेंपल लेने के लिए उपकरण लगाए गए हैं।
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टीम के सदस्य और भौतिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. आलोक सागर गौतम ने बताया कि उपकरणों ने 23 अक्तूबर से नमूने लेने शुरू कर दिए हैं। दीपावली के बाद 30 अक्तूबर तक नमूने लिए जाएंगे। उपकरणों से मिले नमूनों के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि इस दौरान किसी तत्व की मात्रा बढ़ी और किसकी घटी।
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यह है टीम में शामिल
डा. अभिलाष पारिकर, डा. दीवान बिष्ट व डा.संदीप (आईआईटीएम पुणे), डा. विजय श्रीधर व मंयक गैरोला (दून विवि देहरादून), डा. आरएस नेगी (विभागाध्यक्ष ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग गढ़वाल विवि) और डा. आलोक सागर गौतम, संजीव कुमार, निधि गैरोला व अजय कुमार (भौतिकी विभाग, गढ़वाल विवि)
यह है उपकरण
हाई वॉल्यूम सेंपलर- 2.5 से 10 माइक्रोमीटर के कणों को एकत्रित करने वाला उपकरण।
एथेलोमीटर- 50 नैनोमीटर से ऊपर के कणों के नमूने लेने वाला उपकरण
ग्रीम-50 नैनोमीटर से नीचे के कणों के नमूने लेने वाला उपकरण।
एसओटू गैस एनालाइजर- वातावरण में सल्फर डाई ऑक्साइड गैस का पता लगाने वाला उपकरण।