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खेतों में ही न सड़ जाए अदरक
कीर्तिनगर
Updated Mon, 16 Nov 2015 09:28 PM IST
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डागर पट्टी में नवंबर माह आधा बीतने के बाद भी अदरक खेतों में पड़ा है। जबकि पिछले वर्षों तक अक्तूबर माह तक सारा अदरक बिक जाता है। अदरक नहीं बिकने की वजह उत्पादकों को सही भाव न मिलना है। हाल यह है कि पिछले साल खेतों में 40 रुपये प्रति कलो बिकने वाला अदरक इस वर्ष 28 रुपये प्रति किलो से ऊपर नही बढ़ रहे हैं।
डागर पट्टी के डागर, कोठार, कुरोली, बेंजवाड़ी, जाखी, गवाणा, कोटी, पिलखी, ग्वाड़, रोला, राड़ागाड़, रैतासी और जखेड़ सहित करीब दो दर्जन गंावों में भारी मात्रा में अदरक की पैदावार होती है। यहां काश्तकारों ने करीब तीस वर्षों से अदरक की खेती को अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाया हुआ है।
हर साल अक्तूबर माह मेें यहां का अदरक खेतों में ही बिक जाता है। पिछले वर्ष करीब 80 ट्रकों में यहां से बाहर की मंडियों में अदरक बिका था। खरीददारों ने तब 40 रुपये प्रति किलो की दर से खेत से अदरक खरीद लिया था। गांव में ही अदरक का अच्छा भाव मिलने से उत्पादक उत्साहित थे। इस साल खेतों मेें अदरक की अच्छी फसल भी हुई, लेकिन खरीददारों ने एक झटके में सबको निराश कर दिया। खरीददारों ने अदरक की कीमत पिछले साल से काफी कम लगाई। खरीददार 28 रुपये प्रति किलो से आगे नहीं बढ़े। उत्पादक इतनी कम कीमत पर अदरक देने को तैयार नहीं है।
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ग्रामीण रणवीर सिंह, नरेश, रमेश, राधा देवी व विमला देवी का कहना है कि खरीददार कौडिय़ों के भाव अदरक खरीदना चाह रहे हैं। अदरक बिक जाता, तो खेत खाली हो जाते। अब गेहूं बोने का समय हो रहा है। कुछ दिन बाद पाला पड़ने से अदरक भी सड़ जाएगा। उन्हें दोहरा नुकसान हो रहा है।
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डागर पट्टी के डागर, कोठार, कुरोली, बेंजवाड़ी, जाखी, गवाणा, कोटी, पिलखी, ग्वाड़, रोला, राड़ागाड़, रैतासी और जखेड़ सहित करीब दो दर्जन गंावों में भारी मात्रा में अदरक की पैदावार होती है। यहां काश्तकारों ने करीब तीस वर्षों से अदरक की खेती को अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाया हुआ है।
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हर साल अक्तूबर माह मेें यहां का अदरक खेतों में ही बिक जाता है। पिछले वर्ष करीब 80 ट्रकों में यहां से बाहर की मंडियों में अदरक बिका था। खरीददारों ने तब 40 रुपये प्रति किलो की दर से खेत से अदरक खरीद लिया था। गांव में ही अदरक का अच्छा भाव मिलने से उत्पादक उत्साहित थे। इस साल खेतों मेें अदरक की अच्छी फसल भी हुई, लेकिन खरीददारों ने एक झटके में सबको निराश कर दिया। खरीददारों ने अदरक की कीमत पिछले साल से काफी कम लगाई। खरीददार 28 रुपये प्रति किलो से आगे नहीं बढ़े। उत्पादक इतनी कम कीमत पर अदरक देने को तैयार नहीं है।
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ग्रामीण रणवीर सिंह, नरेश, रमेश, राधा देवी व विमला देवी का कहना है कि खरीददार कौडिय़ों के भाव अदरक खरीदना चाह रहे हैं। अदरक बिक जाता, तो खेत खाली हो जाते। अब गेहूं बोने का समय हो रहा है। कुछ दिन बाद पाला पड़ने से अदरक भी सड़ जाएगा। उन्हें दोहरा नुकसान हो रहा है।