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कमलेश्वर महादेव मंदिर में आज होगी घृत कमल पूजा

Sun, 06 Feb 2022 10:27 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 06 Feb 2022 10:27 PM IST
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Ghrit lotus worship will be done in Kamleshwar Mahadev temple today
कमलेश्वर महादेव मंदिर श्रीनगर --------- फाईल फोटो - फोटो : SHRINAGAR
कमलेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार (आज) रात घृत कमल पूजा और दिगंबर लोट परिक्रमा अनुष्ठान आयोजित होगा। अनुष्ठान की आयोजन के लिए मंदिर समिति की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई है।
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हर वर्ष माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी को कमलेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। ऐसा विश्वास है कि देवताओं ने यह पूजा भगवान शिव को हिमालय पुत्री माता पार्वती से दूसरा विवाह करने हेतु की थी। कमलेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री 108 आशुतोष पुरी महाराज ने बताया कि तारकासुर दैत्य ने भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था कि उसकी मृत्यु शिव के पुत्र के हाथों ही होगी। तारकासुर जानता था कि भगवान शिव माता सती (राजा दक्ष की पुत्री) की मृत्यु के बाद दूसरा विवाह नहीं करेंगेे और साधना में लीन हो गए हैं। ऐसे में उनके पुत्र के जन्म की कोई संभावना नहीं है। अमर रहने के घमंड में डूबे तारकासुर ने अपने अत्याचारों से पूरे ब्रह्मांड में हाहाकार मचा दिया। उसने समस्त संसार मेें अपना आधिपत्य जमा लिया।
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तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित सभी देवता भगवती का आह्वान करते हैं, जिस पर भगवती हिमालय पुत्री उमा (नंदा) के रूप में जन्म लेती है। लेकिन शिवजी ध्यान अवस्था में लीन थे। कामदेव उनकी साधना भंग कर देते हैं। तत्पश्चात सभी देवता शिव को विवाह के लिए मनाते है। महंत के अनुसार कमलेश्वर मंदिर में ही भगवान शिव को तारकासुर के अत्याचारों के बारे में बताया जाता है। संसार से विरक्त को विवाह हेतु मनाने के लिए शादी का माहौल बनाया जाता है। इस उपलक्ष्य में कमलेश्वर मंदिर में घृत कमल अनुष्ठान आयोजित होता है। अनुष्ठान के तहत शिव लिंग पर घी का लेप किया जाता है। साथ ही 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर शिव लिंग को कंबल से ढक दिया जाता है। पूजा अनुष्ठान के बाद मंदिर के महंत दिगंबर जमीन पर लोट कर शिव लिंग की परिक्रमा करते है। ब्रह्म मुहूर्त में शिवलिंग से कंबल हटा दिया जाता है।
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