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मानसून में कोरोना का खतरा बढ़ने की आशंका

Sun, 03 May 2020 08:48 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2020 08:48 PM IST
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Fear of increased risk of corona in monsoon
corona - फोटो : web
श्रीनगर। मानसून काल में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका है। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के डॉ. श्रवण कुमार ने मौसम और कोविड-19 का असर विषय पर अध्ययन के आधार पर यह आशंका जताई है। वह शनिवार को हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय में ऑनलाइन आयोजित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपनी बात रख रहे थे।
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सम्मेलन में कोविड-19 से भविष्य में पढने वाले प्रभावों पर चर्चा की गई। इस दौरान आईआईटीएम, नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव ने वर्तमान में विकासशील राष्ट्रों में शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण ऊर्जा की बढ़ती मांग और इसके वायु गुणवत्ता पर पड़ रहे प्रभावों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन ने यातायात, निर्माण कार्य और औद्योगिक गतिविधियों में कमी की है। इससे वायु प्रदूषण कम हुआ हैै।
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डॉ. राजन सुदेश रत्ना ने ‘सोशियो इकोनामिक डायमेंशन ऑफ सोसाइटी एंड स्पेशल फोकस ऑन इंडिया’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 ने बड़े पैमाने पर मानव जीवन, स्वास्थ्य प्रणाली और विश्व अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।
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पर्यावरण विज्ञान के शिक्षक डॉ. एसपी सती ने भविष्य में कोरोना वायरस के मानव जाति पर पडने वाले प्रभावों पर जानकारी दी। कहा कि इस महामारी को देखते हुए अब स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारें ज्यादा निवेश करेंगी। संयोजक डॉ. आलोक सागर गौतम के अनुसार सम्मेलन में प्रो. आरसी रमोला, डॉ. पवन, सुरेंद्र प्रताप, प्रो. सीमा धवन आदि ने शिरकत की।

प्रो. आरएस नेगी, प्रो. महावीर सिंह नेगी, डा. सुरेंद्र प्रताप सिंह एवं डा. देवेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।
कोविड-19 पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार 5 से
देवप्रयाग। राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा कोविड-19 जागरूकता विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम सचिव डॉ. अशोक कुमार मेंदोला ने बताया कि यह कार्यक्रम 5 मई से शुरू हो रहा है, जिसके लिए 88 लोग अब तक पंजीकरण करवा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का मुख्य उद्देश्य लॉकडाउन में रिसर्च गतिविधियों को जारी रखकर लोगों को उत्साहित और जागरूक करना है। संवाद
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