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घायलों की मदद करने वालों को इनाम देगी पुलिस : एसपी
पौड़ी
Updated Sat, 07 Nov 2015 07:02 PM IST
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पुलिस अधीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि जिले में अब सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद करने वाला अब किसी सिविल और आपराधिक दायित्व के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की मदद करने वालों से अब कोई पूछताछ नहीं की जाएगी। पूछताछ करने के बजाय अब पुलिस की ओर से उसे उचित इनाम दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले में सभी पुलिस अधिकारियों को इन निर्देशों का अनुपालन करने के लिए निर्देशित किया गया है।
अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पुलिस अधीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि अभी तक सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वालों से अक्सर घटना और पीड़ित के बारे में काफी पूछताछ की जाती है। कई मामलों में उसे उसकी इच्छा के बिना मजबूरन गवाह भी बनाया जाता है। ऐसे में लोग सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने से कतराते हैं।
इसको देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने 29 अक्तूबर को अपने एक फैसले में सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की सहायता करने वालों, उन्हें चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने वालों के बचाव के निर्देश दिए गए हैं। इसके अंतर्गत अब सड़क दुर्घटना से घायल कोई भी व्यक्ति अस्पताल ले जा सकता है। चिकित्सालय में उससे उसके पते के अलावा घटना के बारे में कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा। बिना पूछताछ के उसे जाने की अनुमति दी जाएगी। पूछताछ करने के बजाय उसे घायल की मदद के लिए आगे आने का इनाम दिया जाएगा।
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एसपी ने बताया कि घायल व्यक्ति के बारे में पुलिस को सूचना देने, आपातकालीन सेवाओं में सूचना देने वाले को भी अब अपना नाम और व्यक्तिगत वितरण देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। संपर्क वितरण जैसी व्यक्तिगत सूचना बताया जाना अब स्वैच्छिक की जगह वैकल्पिक बनाया गया है। एसपी ने कहा घायल को अस्पताल पहुंचाने वालों को सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में भी नहीं रोका जाएगा। उससे घायल के पंजीकरण और भर्ती की लागतों का भुगतान भी नहीं मांगा जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी को भी पत्र भेजा गया है।
ह्वाट्सएप से जुड़ा पुलिस कंट्रोल रूम
पौड़ी। पुलिस अधीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए जिले के पुलिस कंट्रोल रूम को मोबाइल नंबर को ह्वाट्सऐप से जोड़ दिया गया है। 9411112974 वाले इस नंबर पर ह्वाट्सएप के जरिये भी शिकायतों को दर्ज कराया जा सकता है। कहा कि वह खुद रोज इसकी समीक्षा कर रहे हैं।
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अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पुलिस अधीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि अभी तक सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वालों से अक्सर घटना और पीड़ित के बारे में काफी पूछताछ की जाती है। कई मामलों में उसे उसकी इच्छा के बिना मजबूरन गवाह भी बनाया जाता है। ऐसे में लोग सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने से कतराते हैं।
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इसको देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने 29 अक्तूबर को अपने एक फैसले में सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की सहायता करने वालों, उन्हें चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने वालों के बचाव के निर्देश दिए गए हैं। इसके अंतर्गत अब सड़क दुर्घटना से घायल कोई भी व्यक्ति अस्पताल ले जा सकता है। चिकित्सालय में उससे उसके पते के अलावा घटना के बारे में कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा। बिना पूछताछ के उसे जाने की अनुमति दी जाएगी। पूछताछ करने के बजाय उसे घायल की मदद के लिए आगे आने का इनाम दिया जाएगा।
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एसपी ने बताया कि घायल व्यक्ति के बारे में पुलिस को सूचना देने, आपातकालीन सेवाओं में सूचना देने वाले को भी अब अपना नाम और व्यक्तिगत वितरण देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। संपर्क वितरण जैसी व्यक्तिगत सूचना बताया जाना अब स्वैच्छिक की जगह वैकल्पिक बनाया गया है। एसपी ने कहा घायल को अस्पताल पहुंचाने वालों को सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में भी नहीं रोका जाएगा। उससे घायल के पंजीकरण और भर्ती की लागतों का भुगतान भी नहीं मांगा जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी को भी पत्र भेजा गया है।
ह्वाट्सएप से जुड़ा पुलिस कंट्रोल रूम
पौड़ी। पुलिस अधीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए जिले के पुलिस कंट्रोल रूम को मोबाइल नंबर को ह्वाट्सऐप से जोड़ दिया गया है। 9411112974 वाले इस नंबर पर ह्वाट्सएप के जरिये भी शिकायतों को दर्ज कराया जा सकता है। कहा कि वह खुद रोज इसकी समीक्षा कर रहे हैं।