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बस हादसा परिजनों को ताउम्र जख्म दे गया

Tue, 10 Nov 2015 09:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,सतपुली
ब्यूरो/अमर उजाला,सतपुली Updated Tue, 10 Nov 2015 09:35 PM IST
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नजीबाबाद-बुआखाल नेशनल हाईवे संख्या-534 पर गूमखाल के बैरगांव के निकट सोमवार को हुई बस दुर्घटना एकेश्वर और चौबट्टाखाल क्षेत्र के कई घरों के लोगों को जीवनभर का जख्म दे गई है।

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दिवाली की खुशियां यहां मातम में बदल गई है। हादसे ने जहां सात लोगों की जिंदगी लील ली है, वहीं 22 घायल देहरादून, जौलीग्रांट और कोटद्वार के अस्पतालों में मौत और जिंदगी के बीच झूल रहे हैं।
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दिवाली मनाने अपने गांव लौट रहे इन अभागों को तनिक भी भान नहीं था कि उनके साथ क्या वाला है। इस बार की दीवाली उनके लिए काली दीवाली बनकर आई। यही नहीं भविष्य में आने वाली हर दीवाली पर उन्हें यह हादसा सालता रहेगा।
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दुर्घटना में मारी गयी डौली बिष्ट के जेठ जितेंद्र बिष्ट बिलखते हुए बताते हैं कि डौली अपने दो वर्षीय बेटे आदित्य और उसके बड़े भाई नैतिक के साथ दिवाली मनाने अपने गांव जा रही थी, लेकिन नियति ने उन मासूमों के सिर से छोटी उम्र में ही मां का आंचल छीन लिया है। वहीं सतपुली निवासी यूसुफ दिवाली में अच्छा करोबार करने की हसरत से कसबे में आ रहे थे, लेकिन वह इस हसरत को दिल में लिए ही इस दुनिया से विदा हो गए।

उनकी पत्नी शमशीदा समेत बच्चों की समझ में नहीं आ रहा कि अब जिंदगी का सफर कैसे कटेगा। कुंडोली-मालई निवासी मनमोहन सिंह यूपी के बिजनौर जिले में बीएसएनएल में कार्यरत थे। वे भी छुट्टी लेकर दिवाली मनाने अपने गांव कुंडोली मालई जाने के लिए इस अभागी बस में चढ़े थे, कि रास्ते में हादसे का शिकार हो गए।


 गिंवाली निवासी धर्मेंद्र और रिंगवाड़ी निवासी धर्मेद्र हों या सकनोली निवासी रोहित सभी हंसी खुशी के साथ दीवाली मनाने अपने घरों को लौट रहे थे। इन सबका सफर मुकाम पर पहुंचने से पहले ही खतम हो गया।

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