बारूद के ढेर पर बैठा श्रीनगर दे रहा अनहोनी को न्योता
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दीपावली त्योहार पर शहर तीन दिनों के लिए बारूद के ढेर पर बैठा है। शहर के सबसे व्यस्त गोला बाजार में पटाखों की करीब 20 बड़ी दुकानें सजी हैं। पटाखा विक्रेता मानकों का भी उल्लंघन कर रहे हैं।
अधिकांश पटाखा विक्रेताओं ने अग्निशमन यंत्र व पानी की बाल्टी तक नहीं रखी हैं। इन पटाखा दुकानों में अस्थायी विद्युत लाइनों के तार भी बेतरतीब झूल रहे हैं। शिक्षक मनोजकांत उनियाल का कहना है कि व्यस्ततम बाजार में पटाखों का बाजार लगाना लोगों की जान से खिलवाड़ करना हैं।
महेशानंद डोबरियाल ने कहा कि पहले भीड़भाड़ कम होती थी, लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। धनतेरस व दीपावली के दिन हजारों की संख्या में बाजार में लोग पहुंचते हैं। भीड़भाड़ वाले बाजार में पटाखों की दुकानें सजाना व मानकों का उल्लंघन करना लोगों की जान को खतरे में डालना है। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि पटाखों की दुकानों पर मानकों का पालन किया जाए। इसके लिए नियमित निरीक्षण किया जा रहा है।
मानकों में अनदेखी पड़ सकती है भारी
शहर में आतिशबाजी की दुकान लगाने में इस बार भी मानकों की अनदेखी की गई है। प्रशासन की ओर से इस बार भी गली कूचों में दुकान लगाने की अनुमति दी गई है। मानकों की यह अनदेखी आम लोगों पर भारी पड़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि आतिशबाजी की दुकानें खोलने के लिए कई मानक निर्धारित हैं। मानकों के मुताबिक दुकानें खुली जगहों पर ही खोली जा सकती हैं।
एक दुकान से दूसरी दुकान की दूरी तीन मीटर से अधिक होनी जरूरी है। जिन जगहों में इन्हें खोलने के लिए लाइसेंस दिए जाते हैं वहां फायर ब्रिगेड के वाहन पहुंचने के लिए जगह का होना जरूरी होता है।
शहर में इस मामले में मानकों की खूब अनदेखी हुई है। शहर में ज्यादातर आतिशबाजी की दुकानें भीड़ भाड़ वाली जगहों, गली कूचों में खुली हुई है। कई दुकानें तो ऐसी जगहों पर खुली हैं जहां दमकल का वाहन तो दूर छोटी गाड़ी का जाना भी संभव नहीं है। ऐसे में कभी अनहोनी होने पर बड़ी मुश्किलें आ सकती हैं।
उप जिलाधिकारी पीएल शाह कहते हैं कि शहर की विषम भौगोलिक परिस्थतियां होने के कारण यह स्थितियां बनी हैं। उन्होंने बताया कि सभी दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे रेत और पानी रखा हुआ है।
जिला अग्नि शमन अधिकारी प्रेम सिंह सती ने बताया कि शहर में अलग अलग जगहों पर दो दमकल वाहन खड़े किए हुए हैं। दुकानों का समय-समय पर निरीक्षण किया जा रहा है।