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उत्तराखंड: सीएजी की रिपोर्ट में नमामि गंगे की हकीकत, देवप्रयाग से हरिद्वार तक गंगा में 32 गुना बढ़ा प्रदूषण

Fri, 30 Oct 2026 02:13 PM IST
Renu Saklani मुकेश चंद्र आर्य, संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
मुकेश चंद्र आर्य, संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी Published by: Renu Saklani Updated Fri, 30 Oct 2026 02:13 PM IST
सार

गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन सीवेज प्रबंधन की खामियों ने इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में कई एसटीपी की कार्यप्रणाली और सीवरेज व्यवस्था में गंभीर कमियां सामने आई हैं।

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CAG report raises questions over namami gange coliform pollution in ganga rises 32 times in uttarakhand
हरिद्वार गंगा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने नमामि गंगे कार्यक्रम पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 से 2023 के ऑडिट में सीवेज प्रबंधन की खराब व्यवस्था सामने आई है। देवप्रयाग से हरिद्वार के बीच गंगा में कोलीफॉर्म का स्तर 32 गुना बढ़ गया है।

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सीएजी ने पाया कि 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में से 12 से बिना उपचारित सीवेज गंगा और सहायक नदियों में जा रहा था। सात शहरों में बने 21 एसटीपी से कोई घरेलू कनेक्शन नहीं जुड़ा था। इससे इन संयंत्रों का वास्तविक उपयोग नहीं हो पा रहा था। कई एसटीपी की उपचार क्षमता भी अपर्याप्त मिली। नालों की प्रभावी टैपिंग न होने से सीवेज सीधे नदी में पहुंच रहा था।

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श्रीनगर, उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, देहरादून और हरिद्वार जिलों में जिला गंगा समितियों ने नदी बेसिन प्रबंधन योजना नहीं बनाई। राज्य सरकार ने सीवेज विकास पर 55.08 करोड़ रुपये खर्च किए। हालांकि, गंगा फ्रंट टाउन में सीवरेज व्यवस्था बढ़ाने के लिए कोई राशि खर्च नहीं हुई। कई संयंत्र राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मानकों के अनुरूप काम नहीं कर रहे थे।

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घरेलू कनेक्शन की कमी

रिपोर्ट में घरेलू सीवर कनेक्शन की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। श्रीनगर में 6523 घरों में से केवल 797 यानी 12.22 फीसदी घर सीवर नेटवर्क से जुड़े। चमोली-गोपेश्वर में 5510 घरों में से 354 यानी 6.42 फीसदी ही जुड़ पाए। उत्तरकाशी के ज्ञानसू में 6089 घरों में से 572 यानी 9.39 फीसदी घर ही जुड़े थे। उत्तराखंड जल संस्थान ने खामियों के चलते श्रीनगर के एसटीपी को अपने अधीन लेने से इन्कार कर दिया था।

हरिद्वार व ऋषिकेश की स्थिति चिंताजनक

गंगा के मैदानी शहरों हरिद्वार और ऋषिकेश में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। हरिद्वार में 68802 घरों में से 47728 यानी 69.37 फीसदी घर सीवर नेटवर्क से जुड़े। ऋषिकेश, तपोवन और मुनि की रेती में 34756 घरों में से केवल 9966 यानी 28.67 फीसदी घर ही जुड़ पाए। सीएजी ने एसटीपी निर्माण के साथ घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ना भी जरूरी बताया।

93 किमी में बढ़ा प्रदूषण

सीएजी ने हरिद्वार स्थित हर की पैड़ी और देवप्रयाग के दस साल के आंकड़ों की तुलना की। जिसमें अक्तूबर 2023 तक देवप्रयाग से हरिद्वार के बीच करीब 93 किमी की दूरी में कुल कोलीफॉर्म का स्तर 32 गुना बढ़ गया। रिपोर्ट में इसका एक प्रमुख कारण बिना उपचारित सीवेज का नदी में जाना बताया गया है।

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धरासू से गंगोत्री तक नदी में बैक्टीरियोफेज 1100 प्रतिशत दर्ज किया गया था। जो पानी को सुरक्षित करता है। वहीं देवप्रयाग से ऋषिकेश तक आवासीय गतिविधियां कम हैं। ऐसे में होटलो, रेस्टोरेंट आदि का सीवेज नदी में जाने से कोलीफॉर्म बढ़ सकता है। - प्रो. पीपी बडोनी, वरिष्ठ रसायनशास्त्री/ पूर्व ओएसडी स्पर्श गंगा अभियान।

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