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अमर उजाला ने सेंटे थेरेसास कान्वेंट स्कूल में कराई वाद-विवाद प्रतियोगिता
श्रीनगर
Updated Mon, 02 Nov 2015 09:51 PM IST
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स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे राज्य बनने के बाद भी पलायन, रोजगार, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार और संसाधनों के उपयोग जैसे सवाल जस के तस होने पर वह मायूस हैं।
अमर उजाला की ओर से सेंट थेरेसास कान्वेंट स्कूल में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से अलग होने के फैसले पर बेबाकी से विचार रखे। प्रतियोगिता का शुभांरभ केंद्रीय विवि के कुलपति डा. जेएल कौल, कुलपति के ओएसडी प्रो. जेएल कौल, फादर बीजू और प्रधानाचार्या सिस्टर लीना ने किया।
कुलपति डा. कौल ने कहा कि राज्य बने 15 साल हुए हैं। इस राज्य को यूरोपीय देशों की तरह विकसित किया जा सकता है। यहां प्राकृतिक संपदा भरपूर है। उन्होंने उत्तराखंड की तुलना जम्मू-कश्मीर से करते हुए कहा कि यहां भी विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों का विकास हो सकता है। ओएसडी प्रो. नेगी ने कहा कि राज्य में प्रचुर मात्रा में औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं। इनको रोजगार का साधन बनाया जाना चाहिए।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में पृथक राज्य स्थापना के विपक्ष में शशांक शेखर ममगाईं, मिली डंगवाल, लोकेश सजवाण व सौम्य जुयाल ने कहा कि राज्य में उत्पादित बिजली यूपी जा रही है। पहाड़ से मरीजों का मैदानी क्षेत्रों के लिए रेफर किया जाता है। भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ है। उन्होंने नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सड़क की स्थितियों में सुधार नहीं हुआ है। 15 साल में स्थायी राजधानी नहीं ढूंढ पाए हैं।
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पक्ष के क्षितिज बहुगुणा, दिव्या रावत, शिवम उनियाल, चर्चिल चौहान ने कहा कि विकास धीरे-धीरे होता है। राज्य में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों सहित विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। इस अवसर पर लोकनृत्य और लोकगीत शिवानी उनियाल व ग्रुप ने प्रस्तुत किया। निर्णायक मंडल में सुषमा असवाल, मधु गांगिल, ब्रजेंद्र भंडारी शामिल थे। संचालन शिक्षिका शकुंतला सेमवाल व छात्रा मानसी ने किया।
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अमर उजाला की ओर से सेंट थेरेसास कान्वेंट स्कूल में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से अलग होने के फैसले पर बेबाकी से विचार रखे। प्रतियोगिता का शुभांरभ केंद्रीय विवि के कुलपति डा. जेएल कौल, कुलपति के ओएसडी प्रो. जेएल कौल, फादर बीजू और प्रधानाचार्या सिस्टर लीना ने किया।
कुलपति डा. कौल ने कहा कि राज्य बने 15 साल हुए हैं। इस राज्य को यूरोपीय देशों की तरह विकसित किया जा सकता है। यहां प्राकृतिक संपदा भरपूर है। उन्होंने उत्तराखंड की तुलना जम्मू-कश्मीर से करते हुए कहा कि यहां भी विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों का विकास हो सकता है। ओएसडी प्रो. नेगी ने कहा कि राज्य में प्रचुर मात्रा में औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं। इनको रोजगार का साधन बनाया जाना चाहिए।
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वाद-विवाद प्रतियोगिता में पृथक राज्य स्थापना के विपक्ष में शशांक शेखर ममगाईं, मिली डंगवाल, लोकेश सजवाण व सौम्य जुयाल ने कहा कि राज्य में उत्पादित बिजली यूपी जा रही है। पहाड़ से मरीजों का मैदानी क्षेत्रों के लिए रेफर किया जाता है। भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ है। उन्होंने नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सड़क की स्थितियों में सुधार नहीं हुआ है। 15 साल में स्थायी राजधानी नहीं ढूंढ पाए हैं।
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पक्ष के क्षितिज बहुगुणा, दिव्या रावत, शिवम उनियाल, चर्चिल चौहान ने कहा कि विकास धीरे-धीरे होता है। राज्य में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों सहित विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। इस अवसर पर लोकनृत्य और लोकगीत शिवानी उनियाल व ग्रुप ने प्रस्तुत किया। निर्णायक मंडल में सुषमा असवाल, मधु गांगिल, ब्रजेंद्र भंडारी शामिल थे। संचालन शिक्षिका शकुंतला सेमवाल व छात्रा मानसी ने किया।