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इसी माह जिला अस्पताल में तैनात होंगे सात डाक्टर
Pauri
Updated Wed, 29 Oct 2014 05:32 AM IST
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पौड़ी। पौड़ी के विधायक सुंदरलाल मंद्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ओमप्रकाश ने उन्हें पौड़ी के जिला अस्पताल में इसी माह सात डाक्टरों की तैनाती करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि धरने में बैठने से मकसद पूरा नहीं होता है।
विधायक मंद्रवाल ने कहा कि जिला अस्पताल में डाक्टरों की तैनाती की मांग को लेकर शनिवार को उन्होंने सीएम आवास में जाकर मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रमुख सचिव ओमप्रकाश से वार्ता की। सीएम के प्रमुख सचिव ने उन्हें पौड़ी के जिला अस्पताल में इसी माह फिजिशियन, कार्डियोलोजिस्ट समेत सात डाक्टरों की तैनाती का आश्वासन दिया है। विधायक ने कहा कि जन चेतना मंच के एक व्यक्ति ने दूरभाष पर उनसे पौड़ी में धरने पर बैठने को कहा था। उन्होंने कहा कि वे जहां विकास संबंधी कार्य होते हैं वहीं रहते हैं। उनका उद्देश्य अपनी विधानसभा क्षेत्र का विकास करना है। धरने पर बैठने से मकसद पूरा नहीं होता है। कहा कि पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति की ओर से पिछले साल इसी मांग को लेकर जिला अस्पताल में चलाए जा रहे धरना स्थल पर उन्हें अपमानित किया था। मंद्रवाल ने यह भी कहा कि पौड़ी के जिला अस्पताल में वर्ष 2007 से डाक्टरों की कमी है। इस दौरान पौड़ी के दो मुख्यमंत्री भी रहे, लेकिन समिति के सदस्यों ने न तो कभी उन्हें धरना पर बैठने के लिए बुलाया और न ही उनसे कभी त्यागपत्र देने को कहा गया।
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विधायक मंद्रवाल ने कहा कि जिला अस्पताल में डाक्टरों की तैनाती की मांग को लेकर शनिवार को उन्होंने सीएम आवास में जाकर मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रमुख सचिव ओमप्रकाश से वार्ता की। सीएम के प्रमुख सचिव ने उन्हें पौड़ी के जिला अस्पताल में इसी माह फिजिशियन, कार्डियोलोजिस्ट समेत सात डाक्टरों की तैनाती का आश्वासन दिया है। विधायक ने कहा कि जन चेतना मंच के एक व्यक्ति ने दूरभाष पर उनसे पौड़ी में धरने पर बैठने को कहा था। उन्होंने कहा कि वे जहां विकास संबंधी कार्य होते हैं वहीं रहते हैं। उनका उद्देश्य अपनी विधानसभा क्षेत्र का विकास करना है। धरने पर बैठने से मकसद पूरा नहीं होता है। कहा कि पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति की ओर से पिछले साल इसी मांग को लेकर जिला अस्पताल में चलाए जा रहे धरना स्थल पर उन्हें अपमानित किया था। मंद्रवाल ने यह भी कहा कि पौड़ी के जिला अस्पताल में वर्ष 2007 से डाक्टरों की कमी है। इस दौरान पौड़ी के दो मुख्यमंत्री भी रहे, लेकिन समिति के सदस्यों ने न तो कभी उन्हें धरना पर बैठने के लिए बुलाया और न ही उनसे कभी त्यागपत्र देने को कहा गया।
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