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सरकारी सिस्टम को आईना दिखाने उतरे ग्रामीण

Sat, 18 Oct 2014 05:33 AM IST
Pauri
Pauri Updated Sat, 18 Oct 2014 05:33 AM IST
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कोटद्वार। द्वारीखाल विकासखंड के सौड़ के ग्रामीण इन दिनों सरकारी सिस्टम को आईना दिखाने में जुटे हैं। अगस्त महीने की बाढ़ में बही सिंचाई नहर के निर्माण के लिए न सिर्फ पत्थर तोड़ रहे है, बल्कि हजारों रुपये की सीमेंट खरीदने के लिए चंदा भी एकत्र किया। ग्रामीण सिंचाई नहर का निर्माण भी खुद कर रहे और जल्द उनके खेतों तक पानी पहुंच जाएगा।
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क्षेत्र में इसी वर्ष 14-15 अगस्त को आसमान से आफत बरसी थी। हेंवल नदी में बाढ़ आने से द्वारीखाल ब्लाक के सौड़ गांव की करीब चार किलोमीटर लंबी सिंचाई नहर का भी नमोनिशान मिट गया था। इस नहर से गांव के 40 परिवारों की एक हजार नाली भूमि सिंचित होती थी। ग्रामीणों की पूरी आजीविका खेती पर ही निर्भर है। नहर बहने के बाद से ही ग्रामीण निर्माण की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के चक्कर काटने लगे थे, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। अधिकारी बजट की कमी का रोना रोते रहे और खेतों में रोपी धान की फसल सूख गई। ग्रामीण धान की फसल से हाथ से धोने के बाद अब गेहूं, प्याज, आलू, अन्य सब्जियाें की फसल उगाने की चुनौती थी। ग्रामीणों ने विभाग का मुंह ताकने के बजाय खुद ही नहर बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए गांव में बैठक बुलाई गई और तय किया कि खुद ही नहर का निर्माण करेंगे। इसके लिए परिवार से एक व्यक्ति को काम पर लगने फैसला किया। गांव के लोग खुद पत्थर तोड़ रहे और खुद चिनाई। सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री खरीदने के लिए भी पैसा की व्यवस्था की। नहर के निर्माण का काम आगे बढ़ रहा है। जल्दी ही खेतों तक पानी पहुंच जाएगा।
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क्या कहते हैं ग्रामीण
गांव के प्रदीप कुमार, कमला देवी, संजय कुमार, सच्चीदानंद, आशु सुयाल, गिरीश चंद्र, मदन सुयाल आदि ग्रामीणों का कहना है कि हम कब तक इन नेताओं और अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाते रहते। सभी ने मिलकर तय किया कि जितना समय, एनर्जी और पैसा हम विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के पास आने जाने में बर्बाद कर रहे हैं उतने में तो हम खुद ही काम कर लेंगे। यही सोचकर खुद ही काम शुरू कर दिया।
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