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विक्रम, देवेंद्र को मिला युवा वैज्ञानिक अवार्ड
Pauri
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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श्रीनगर। सातवें राज्य विज्ञान एवं तकनीकी सम्मेलन -2012 में श्रीनगर के डा. विक्रम सिंह नेगी और देवेंद्र सिंह रावत को युवा वैज्ञानिक का अवार्ड दिया गया है। इन्होंने औषधीय पादपों के इस्तेमाल तथा एंटी कैंसरस दवाओं के निर्माण संबंधी शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं।
यूकोस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में गोविंद बल्लभ पंत हिमालयी पर्यावरण एवं विकास संस्थान के डा. विक्रम सिंह नेगी ने ग्रामीण तकनीकियों के माध्यम से बंजर भूमि पुनर्स्थापन, औषधीय पादपों के कृषिकरण व प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से आजीविका सुधार का मॉडल प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की कृषि भूमि पर जंगली जानवरों के आतंक, सिंचाई तथा भूमि छोड़कर चले जाने से बंजर होने की समस्याएं सामने आ रही हैं। इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर किए गए शोध से लोहाघाट की 20 हेक्टेयर भूमि पर कृषिकरण किया गया। डा. विक्रम ने अपनी सफलता के लिए राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेषी योजना के साथ ही निदेशक डा. एलएमएस पालनी, प्रभारी वैज्ञानिक डा. आरके मैखुरी, डा. बीपी कोठारी का दिशा निर्देशन बताया है। डा. विक्रम पूर्व में भी अवार्ड पा चुके हैं।
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दूसरे युवा वैज्ञानिक केंद्रीय गढ़वाल विवि के रसायन विज्ञान विभाग के शोध विद्यार्थी देवेंद्र सिंह रावत ने एंटी कैंसरस ड्रग्स के उत्पादन के लिए प्रारूप तैयार करने में सफलता पाई है। वे कहते हैं कि हिमालय में पाई जाने वाले कई पौंधों से उनके रसायनों को पृथक करने तक शोध किया गया था, लेकिन एंटी कैंसरस दवा के इस्तेमाल के लिए पहुंचाने की क्रियाविधि पर महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने बताया कि रियम तथा कई अन्य पौंधों से ये रसायन निकालकर दवाओं के इस्तेमाल में लाने के लिए तैयारी की जा रही है। शोध कार्य में विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एमएसएम रावत ने देवेंद्र की मदद की है।
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यूकोस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में गोविंद बल्लभ पंत हिमालयी पर्यावरण एवं विकास संस्थान के डा. विक्रम सिंह नेगी ने ग्रामीण तकनीकियों के माध्यम से बंजर भूमि पुनर्स्थापन, औषधीय पादपों के कृषिकरण व प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से आजीविका सुधार का मॉडल प्रस्तुत किया।
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उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की कृषि भूमि पर जंगली जानवरों के आतंक, सिंचाई तथा भूमि छोड़कर चले जाने से बंजर होने की समस्याएं सामने आ रही हैं। इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर किए गए शोध से लोहाघाट की 20 हेक्टेयर भूमि पर कृषिकरण किया गया। डा. विक्रम ने अपनी सफलता के लिए राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेषी योजना के साथ ही निदेशक डा. एलएमएस पालनी, प्रभारी वैज्ञानिक डा. आरके मैखुरी, डा. बीपी कोठारी का दिशा निर्देशन बताया है। डा. विक्रम पूर्व में भी अवार्ड पा चुके हैं।
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दूसरे युवा वैज्ञानिक केंद्रीय गढ़वाल विवि के रसायन विज्ञान विभाग के शोध विद्यार्थी देवेंद्र सिंह रावत ने एंटी कैंसरस ड्रग्स के उत्पादन के लिए प्रारूप तैयार करने में सफलता पाई है। वे कहते हैं कि हिमालय में पाई जाने वाले कई पौंधों से उनके रसायनों को पृथक करने तक शोध किया गया था, लेकिन एंटी कैंसरस दवा के इस्तेमाल के लिए पहुंचाने की क्रियाविधि पर महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने बताया कि रियम तथा कई अन्य पौंधों से ये रसायन निकालकर दवाओं के इस्तेमाल में लाने के लिए तैयारी की जा रही है। शोध कार्य में विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एमएसएम रावत ने देवेंद्र की मदद की है।