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टपकती छत वाले स्कूल मेें पढ़ते हैं बच्चे
Pauri
Updated Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
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लैंसडौन। राजकीय बालिका इंटर कालेज की छात्राएं जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय भवन की छत जर्जर और पुरानी होने के कारण टपक रही है। उसमें अनेक जगहों पर दरारें पड़ी हुई हैं। इसमें बारिश होते ही पानी नीचे आने लगता है, जिससे करमे और बरामदे पानी से लबालब हो जाते हैं।
विद्यालय के लिए भवन वर्ष 1960 में बनकर तैयार हुआ था, लेकिन भवन बनने के बाद एक बार भी भवन की मरम्मत नहीं हुई। विद्यालय की छत लगभग 15 वर्षों से टपक रही है। बारिश का दिन काटना इसमें भारी पड़ता है। प्रथम तल के कक्षा कक्षों का फर्श लकड़ी का बना हुआ है। छत का पानी टपकने के बाद रुका हुआ पानी भूतल के कक्षों की दीवारों एवं छतों को क्षतिग्रस्त कर रहा है, जिससे लकड़ी की छत एवं जगह-जगह बनी दरारें खतरे का संकेत दे रही हैं। पठन पाठन कक्षों एवं प्रयोगशालाओं के कक्षों में सीलन बदबू मार रही है। साथ ही वहां की सामग्री भी खराब हो रही है।
क्या है लोगों का कहना
-बारिश होते ही विद्यालय की छतें टपकने लगती हैं। विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षा विभाग का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इसमें बजट न होने की बातें कही जा रही हैं।
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-संदीप अग्रवाल, सामाजिक कार्यकर्ता
-टपकती छतों और जर्जर होती दीवारों से सभी कक्षों में रखे सामान खराब हो रहे हैं। इस बारे में विभाग से कई बार कहा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
-मुन्नी देवी, अध्यक्ष, शिक्षक अभिभावक संघ
कोट---
-भवन की मरम्मत के लिए शिक्षा विभाग से बजट की मांग की गई है। बजट अभी मंजूर नहीं हो पाया है।
-नंदा रावत, प्रधानाचार्य
-भवन की मरम्मत को लेकर उनको जानकारी मिली है। उचाधिकारियों को अवगत कराया गया है। इसमें सुधार किया जाएगा।
- सुदर्शन सिंह, खंड शिक्षाधिकारी, लैंसडौन
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विद्यालय के लिए भवन वर्ष 1960 में बनकर तैयार हुआ था, लेकिन भवन बनने के बाद एक बार भी भवन की मरम्मत नहीं हुई। विद्यालय की छत लगभग 15 वर्षों से टपक रही है। बारिश का दिन काटना इसमें भारी पड़ता है। प्रथम तल के कक्षा कक्षों का फर्श लकड़ी का बना हुआ है। छत का पानी टपकने के बाद रुका हुआ पानी भूतल के कक्षों की दीवारों एवं छतों को क्षतिग्रस्त कर रहा है, जिससे लकड़ी की छत एवं जगह-जगह बनी दरारें खतरे का संकेत दे रही हैं। पठन पाठन कक्षों एवं प्रयोगशालाओं के कक्षों में सीलन बदबू मार रही है। साथ ही वहां की सामग्री भी खराब हो रही है।
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क्या है लोगों का कहना
-बारिश होते ही विद्यालय की छतें टपकने लगती हैं। विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षा विभाग का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इसमें बजट न होने की बातें कही जा रही हैं।
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-संदीप अग्रवाल, सामाजिक कार्यकर्ता
-टपकती छतों और जर्जर होती दीवारों से सभी कक्षों में रखे सामान खराब हो रहे हैं। इस बारे में विभाग से कई बार कहा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
-मुन्नी देवी, अध्यक्ष, शिक्षक अभिभावक संघ
कोट---
-भवन की मरम्मत के लिए शिक्षा विभाग से बजट की मांग की गई है। बजट अभी मंजूर नहीं हो पाया है।
-नंदा रावत, प्रधानाचार्य
-भवन की मरम्मत को लेकर उनको जानकारी मिली है। उचाधिकारियों को अवगत कराया गया है। इसमें सुधार किया जाएगा।
- सुदर्शन सिंह, खंड शिक्षाधिकारी, लैंसडौन