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मालन, सुखरों और खोह पर बनेंगी झील
Pauri
Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
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कोटद्वार। खोह, सूखरो और मालन नदी पर जलाशय बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने सिंचाई विभाग को इस योजना के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए हैं।
विधायक और कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने कोटद्वार की नदियों पर जलाशय बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। इसके लिए सिंचाई विभाग को योजना बनाने के लिए कहा गया था। नदियों पर बनने वाले जलाशयों के लिए केंद्र सरकार से रेन वाटर हार्वेस्टिंग के तहत बजट आवंटित होगा। यह तब ही होगा जब प्रदेश सरकार की ओर से इन योजनाओं की डीपीआर तैयार कर केंद्र को भेजी जाएगी। योजना रंग लाई तो कोटद्वार शहर का काया कल्प हो जाएगा।
क्या होगा फायदा
कोटद्वार में खोह और मालन पर तो हर समय पानी रहता है। जबकि सुखरो बरसाती नदी है। बरसात में तीनों नदियां उफान पर रहती हैं। इन नदियों के पानी को रोकर जलाशय बनाया जाएगा। इससे बेकार बह रहे बरसाती पानी का उपयोग सही तरीके से हो सकेगा। लगातार कम होते भूमिगत जलस्तर को भी रिचार्ज किया जा सकेगा। इससे छोटी जल विद्युत परियोजनाओं संचालित किया जा सकेगा। सिंचाई के लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। इस एकत्र किए गए पानी का आस-पास के क्षेत्र में हरियाली लाने के लिए उपयोग किया जा सकेगा। इन जलाशयों में टूरिस्टों को आकर्षित करने के लिए नौकायन को भी बढ़ावा दिया जाना है।
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कोट-
नदियों पर जलाशय बनाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए डीपीआर बनाने और उस पर आने वाले खर्चे की रिपोर्ट बनाने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है। डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी वहां से बजट मिलने पर काम शुरू कर दिया जाएगा। - सुरेंद्र सिंह नेगी, कैबिनेट मंत्री
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विधायक और कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने कोटद्वार की नदियों पर जलाशय बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। इसके लिए सिंचाई विभाग को योजना बनाने के लिए कहा गया था। नदियों पर बनने वाले जलाशयों के लिए केंद्र सरकार से रेन वाटर हार्वेस्टिंग के तहत बजट आवंटित होगा। यह तब ही होगा जब प्रदेश सरकार की ओर से इन योजनाओं की डीपीआर तैयार कर केंद्र को भेजी जाएगी। योजना रंग लाई तो कोटद्वार शहर का काया कल्प हो जाएगा।
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क्या होगा फायदा
कोटद्वार में खोह और मालन पर तो हर समय पानी रहता है। जबकि सुखरो बरसाती नदी है। बरसात में तीनों नदियां उफान पर रहती हैं। इन नदियों के पानी को रोकर जलाशय बनाया जाएगा। इससे बेकार बह रहे बरसाती पानी का उपयोग सही तरीके से हो सकेगा। लगातार कम होते भूमिगत जलस्तर को भी रिचार्ज किया जा सकेगा। इससे छोटी जल विद्युत परियोजनाओं संचालित किया जा सकेगा। सिंचाई के लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। इस एकत्र किए गए पानी का आस-पास के क्षेत्र में हरियाली लाने के लिए उपयोग किया जा सकेगा। इन जलाशयों में टूरिस्टों को आकर्षित करने के लिए नौकायन को भी बढ़ावा दिया जाना है।
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कोट-
नदियों पर जलाशय बनाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए डीपीआर बनाने और उस पर आने वाले खर्चे की रिपोर्ट बनाने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है। डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी वहां से बजट मिलने पर काम शुरू कर दिया जाएगा। - सुरेंद्र सिंह नेगी, कैबिनेट मंत्री