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आओ तनिक प्यार करें ने दिखाई एकाकी परिवारों की स्थिति
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के छात्रों की ओर से ‘आओ तनिक प्रेम करें’ नाटक मंचित किया गया। नाटक वर्तमान समय में एकांकी परिवारों की स्थिति पर आधारित था, जिसमें बताया गया कि वर्तमान समय में पारिवारिक ढांचे से प्रेम गायब है, सब स्वार्थ के लिए एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। कलाकारों का जीवंत अभिनय व सटीक संवाद दर्शकों को भावुक कर गया।
सोमवार देर शाम लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के ऑडिटोरियम में ‘आओ तनिक प्यार करें’ नाटक मंचित किया गया। विभा रानी के लिखित इस नाटक का निर्देशन डा. कुलीन जोशी व संगीत निर्देशन संजय पांडे ने किया। जबकि नाटक का मंचन एमए थिएटर चतुर्थ सेमेस्टर के छात्रों ने किया। कथानक अनुसार इस नाटक का नायक मिस्टर गुप्ता नौकरी से रिटायर हो गए हैं। उनकी पत्नी सपन एक कामकाजी महिला है, जिसका अधिकांश समय दफ्तर में बीतता है। मिस्टर गुप्ता का बेटा व बेटी है। बेटा नौकरी के चलते दूर शहर में रहता है, जबकि बेटी ने अपनी मर्जी की शादी कर ली है। दूर रहते बच्चे और इस अकेलेपन से जूझते हुए वह चाहते है कि उनकी पत्नी सपन उन्हें समय दें, लेकिन पत्नी मना कर देती है। मिस्टर गुप्ता दिन भर घर में अकेले अकेले वह कुंठित हो जाते हैं। नाटक का भावपूर्ण कथानक व सटीक संवाद दर्शकों को यह सोचने पर विवश करता है कि तमाम विकास और आधुनिकतम सुविधाओं के बीच हम कितने अकेले होते जा रहे हैं। नाटक यह स्पष्ट करता है कि एकाकी परिवारों को ढांचा किस कदर बिखर गया है। परिवार के सदस्यों मेें प्रेम गायब हो गया है। डेढ़ घंटे के इस नाटक को मात्र दो कलाकारों गंगा कुमारी और आशुतोष द्विवेदी ने मंचित किया। कलाकारों के जीवंत अभिनय में दर्शकों को पूरे समय तक बांधे रखा। इस दौरान डा. आशुतोष गुप्ता, डा.विकास फोंदनी, महेश गिरी, छात्र संघ के कार्यकारी अध्यक्ष अंकित उछोली, आर्यन त्यागी, शशांक, दीपक सिंह, अंकुर पांडे, रोहित कुमार, गोपाला कृष्णा, तितिक्षा, निर्मल कोठारी एवं भास्कर झा आदि मौजूद थे।
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राजीव
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सोमवार देर शाम लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के ऑडिटोरियम में ‘आओ तनिक प्यार करें’ नाटक मंचित किया गया। विभा रानी के लिखित इस नाटक का निर्देशन डा. कुलीन जोशी व संगीत निर्देशन संजय पांडे ने किया। जबकि नाटक का मंचन एमए थिएटर चतुर्थ सेमेस्टर के छात्रों ने किया। कथानक अनुसार इस नाटक का नायक मिस्टर गुप्ता नौकरी से रिटायर हो गए हैं। उनकी पत्नी सपन एक कामकाजी महिला है, जिसका अधिकांश समय दफ्तर में बीतता है। मिस्टर गुप्ता का बेटा व बेटी है। बेटा नौकरी के चलते दूर शहर में रहता है, जबकि बेटी ने अपनी मर्जी की शादी कर ली है। दूर रहते बच्चे और इस अकेलेपन से जूझते हुए वह चाहते है कि उनकी पत्नी सपन उन्हें समय दें, लेकिन पत्नी मना कर देती है। मिस्टर गुप्ता दिन भर घर में अकेले अकेले वह कुंठित हो जाते हैं। नाटक का भावपूर्ण कथानक व सटीक संवाद दर्शकों को यह सोचने पर विवश करता है कि तमाम विकास और आधुनिकतम सुविधाओं के बीच हम कितने अकेले होते जा रहे हैं। नाटक यह स्पष्ट करता है कि एकाकी परिवारों को ढांचा किस कदर बिखर गया है। परिवार के सदस्यों मेें प्रेम गायब हो गया है। डेढ़ घंटे के इस नाटक को मात्र दो कलाकारों गंगा कुमारी और आशुतोष द्विवेदी ने मंचित किया। कलाकारों के जीवंत अभिनय में दर्शकों को पूरे समय तक बांधे रखा। इस दौरान डा. आशुतोष गुप्ता, डा.विकास फोंदनी, महेश गिरी, छात्र संघ के कार्यकारी अध्यक्ष अंकित उछोली, आर्यन त्यागी, शशांक, दीपक सिंह, अंकुर पांडे, रोहित कुमार, गोपाला कृष्णा, तितिक्षा, निर्मल कोठारी एवं भास्कर झा आदि मौजूद थे।
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