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नक्षत्र वेदशाला में रखी पांडुलिपियों व ग्रंथों को किया जाएगा संरक्षित: आचार्य बालकृष्ण
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देवप्रयाग। पंतजलि योगपीठ हरिद्वार अब देवप्रयाग स्थित नक्षत्र वेधशाला संस्थान में संग्रहित दुर्लभ पांडुलिपियों व ग्रंथों को संरक्षित करने में सहयोग करेगा। साथ ही नक्षत्र वेधशाला में पुस्तकालय के निर्माण कार्य में भी मदद देगा।
मंगलवार को पंतजलि योगपीठ के महाप्रबंधक आचार्य बालकृष्ण ने नक्षत्र वेधशाला देवप्रयाग का भ्रमण किया। इस दौरान आचार्य बालकृष्ण ने अपने सहयोगियों के साथ नक्षत्र वेधशाला में संग्रहित प्राचीन ग्रंथों, कलाकृतियों, खगोलीय यंत्रों आदि को भी देखा। उन्होंने वेधशाला में संकलित आयुर्वेद व रसायन के प्राचीन ग्रंथों के बारे में जानकारी कर उनका उपयोग जनहित में किये जाने को कहा। आचार्य ने वेधशाला में मौजूद दुर्लभ ग्रंथों के डिजिटाइजेशन व प्रकाशन में पूरा सहयोग का भी आश्वासन दिया। कहा कि वेधशाला में संग्रहित दुर्लभ पांडुलिपियों व ग्रंथों को संरक्षित किया जाएगा। आचार्य बालकृष्ण ने वेधशाला संचालक आचार्य भास्कर जोशी को अपनी लिखी पुस्तकें भोजनकुतूहलम, आयुर्वेद महोदधि, आयुर्वेद रहस्य आदि भेंट की। अपने योग के वैज्ञानिक विवेचन आधारित योग विज्ञानम पुस्तक पर चर्चा कर बताया कि आज के विज्ञान व प्राचीन भारतीय ज्ञान में कितनी समानता है। आचार्य बालकृष्ण ने 1946 में स्व. आचार्य चक्रधर जोशी द्वारा स्थापित नक्षत्र वेधशाला को भारतीय संस्कृति व ज्ञान का गौरव स्थल बताया। कहा कि वेधशाला सीमित साधनों में भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने प्राचीन ज्ञान के इस केंद्र को संरक्षित किए जाने की जरूरत बताई। इस मौके पर आचार्य बालकृष्ण के साथ पतंजलि योगपीठ आयुर्वेद विभाग के डा. राजेश मिश्रा, डा. बीके जोशी व मंगल सिंह आदि मौजूद थे।
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मंगलवार को पंतजलि योगपीठ के महाप्रबंधक आचार्य बालकृष्ण ने नक्षत्र वेधशाला देवप्रयाग का भ्रमण किया। इस दौरान आचार्य बालकृष्ण ने अपने सहयोगियों के साथ नक्षत्र वेधशाला में संग्रहित प्राचीन ग्रंथों, कलाकृतियों, खगोलीय यंत्रों आदि को भी देखा। उन्होंने वेधशाला में संकलित आयुर्वेद व रसायन के प्राचीन ग्रंथों के बारे में जानकारी कर उनका उपयोग जनहित में किये जाने को कहा। आचार्य ने वेधशाला में मौजूद दुर्लभ ग्रंथों के डिजिटाइजेशन व प्रकाशन में पूरा सहयोग का भी आश्वासन दिया। कहा कि वेधशाला में संग्रहित दुर्लभ पांडुलिपियों व ग्रंथों को संरक्षित किया जाएगा। आचार्य बालकृष्ण ने वेधशाला संचालक आचार्य भास्कर जोशी को अपनी लिखी पुस्तकें भोजनकुतूहलम, आयुर्वेद महोदधि, आयुर्वेद रहस्य आदि भेंट की। अपने योग के वैज्ञानिक विवेचन आधारित योग विज्ञानम पुस्तक पर चर्चा कर बताया कि आज के विज्ञान व प्राचीन भारतीय ज्ञान में कितनी समानता है। आचार्य बालकृष्ण ने 1946 में स्व. आचार्य चक्रधर जोशी द्वारा स्थापित नक्षत्र वेधशाला को भारतीय संस्कृति व ज्ञान का गौरव स्थल बताया। कहा कि वेधशाला सीमित साधनों में भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने प्राचीन ज्ञान के इस केंद्र को संरक्षित किए जाने की जरूरत बताई। इस मौके पर आचार्य बालकृष्ण के साथ पतंजलि योगपीठ आयुर्वेद विभाग के डा. राजेश मिश्रा, डा. बीके जोशी व मंगल सिंह आदि मौजूद थे।
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