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उतराखंड में होनी चाहिए हिमाचल पैटर्न पर कृषि एवं उद्यानिकी
Updated Tue, 20 Feb 2018 11:04 PM IST
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पौड़ी। शेर-ए-कश्मीर औद्यानिकी विवि के पूर्व उप कुलपति डॉ. तेज प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से पलायन के बाद कृषि योग्य भूमि का बंजर पड़ना भयावह है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के समान भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड राज्य में हिमाचल पैटर्न के साथ कृषि एवं उद्यानिकी की जाए तो यह आर्थिकी मजबूत करने के साथ पलायन रोकने में सहायक साबित होगा।
पलायन न्यूनीकरण पर कार्य कर रहे पलायन एक चिंतन दल के आमंत्रण पर पौड़ी भ्रमण पर आए उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. तेज प्रताप सिंह ने जिले की नयार घाटी के सिंचित खेतों का स्थलीय भ्रमण किया। उन्होंने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि समतल विस्तार वाले सिंचित खेतों का इस तरह झाड़ियों से पटा होना चिंता का विषय है। इस क्षेत्र में उन्नत कृषि की असीमित संभावनाएं हैं। डॉ. सिंह ने कल्जीखाल ब्लॉक की असवालस्यूं पट्टी के गांवों में भी खेती का जायजा लिया। उन्होंने ग्राम मिर्चोडा में पलायन एक चिंतन की ‘चिंतन कुटीर’ में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां लगभग एक समान हैं। उत्तराखंड में अनेक पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल के मुकाबले कृषि के लिए अधिक मुफीद हैं, लेकिन उत्तराखंड में बंजर भूमि का क्षेत्र लगातार बढ़ना चिंतनीय है। सरकारी महकमे को अनुसंधान संस्थान और किसानों को आपसी सामंजस्य बिठाकर पृथक आबोहवा वाले क्षेत्रों के लिए अलग योजनाएं तैयार करनी होंगी। मानव विहीन हो चुके कल्जीखाल ब्लॉक के बलूनी गांव का दौरा करने के बाद डॉ. सिंह ने कहा कि यदि इच्छा शक्ति हो तो इन बंजर जमीनों से सोना उगाया जा सकता है, लेकिन बिना संकल्प के यहां किसी तरह की उम्मीद करना बेमानी होगा। भ्रमण कार्यक्रम के तीसरे दिन डॉ. सिंह ने कोठार गांव का भ्रमण किया।
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पलायन न्यूनीकरण पर कार्य कर रहे पलायन एक चिंतन दल के आमंत्रण पर पौड़ी भ्रमण पर आए उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. तेज प्रताप सिंह ने जिले की नयार घाटी के सिंचित खेतों का स्थलीय भ्रमण किया। उन्होंने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि समतल विस्तार वाले सिंचित खेतों का इस तरह झाड़ियों से पटा होना चिंता का विषय है। इस क्षेत्र में उन्नत कृषि की असीमित संभावनाएं हैं। डॉ. सिंह ने कल्जीखाल ब्लॉक की असवालस्यूं पट्टी के गांवों में भी खेती का जायजा लिया। उन्होंने ग्राम मिर्चोडा में पलायन एक चिंतन की ‘चिंतन कुटीर’ में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां लगभग एक समान हैं। उत्तराखंड में अनेक पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल के मुकाबले कृषि के लिए अधिक मुफीद हैं, लेकिन उत्तराखंड में बंजर भूमि का क्षेत्र लगातार बढ़ना चिंतनीय है। सरकारी महकमे को अनुसंधान संस्थान और किसानों को आपसी सामंजस्य बिठाकर पृथक आबोहवा वाले क्षेत्रों के लिए अलग योजनाएं तैयार करनी होंगी। मानव विहीन हो चुके कल्जीखाल ब्लॉक के बलूनी गांव का दौरा करने के बाद डॉ. सिंह ने कहा कि यदि इच्छा शक्ति हो तो इन बंजर जमीनों से सोना उगाया जा सकता है, लेकिन बिना संकल्प के यहां किसी तरह की उम्मीद करना बेमानी होगा। भ्रमण कार्यक्रम के तीसरे दिन डॉ. सिंह ने कोठार गांव का भ्रमण किया।
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