{"_id":"5cba0912bdec2213fe5d471b","slug":"161555695890-pauri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पलायन आयोग के औचित्य पर गांववासी ने उठाए सवाल-compat","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पलायन आयोग के औचित्य पर गांववासी ने उठाए सवाल-compat
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पौड़ी। भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी ने उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के औचित्य पर सवाल उठाते हुए प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि पलायन आयोग का नामकरण ही गलत किया गया है। नियंत्रण की कहीं उसमें कोई बात नहीं रखी गई है। आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं है। सिफारिशों को मानने के लिए भी सरकार बाध्य नहीं है।
शुक्रवार को अमर उजाला से वार्ता करते हुए प्रदेश के पूर्व मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा कि गांवों के आर्थिक विकास को लेकर बृहद कार्ययोजना दूरगामी व सीमांत गांवों को ध्यान में रखकर तैयार करनी होगी। इसमें तीर्थाटन, पर्यटन व सांस्कृतिक विरासत को संजोए जाने की आभा अलग नजर आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पलायन आयोग बनाया है। इसमें नियंत्रण की बात को कहीं तवज्जो नहीं दी गई है। उसका औचित्य क्या है, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। आयोग को कोई संवैधानिक दर्जा नहीं दिया गया है। इसका कार्यकाल क्या होगा? क्या इसकी सिफारिशें सरकार मानेगी? इन सब बातों को लेकर नजरिया साफ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में नीति आयोग ही संवैधानिक है। प्रदेश सरकार पलायन को थामने की दिशा में गंभीर है तो पलायन आयोग की सिफारिशें नीति आयोग को सौंपी जानी चाहिए। गांववासी ने कहा कि हम मिलम, गुंजी-कुट्टी, दारमा, नीती घाटी, प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के प्रहरी गांवों तक सड़क सहित अन्य सुविधाएं पहुंचाने में असफल रहे हैं। चारधाम यात्रा भी भगवान भरोसे ही चल रही है। प्रदेश के अन्य मठ, मंदिरों, ऐतिहासिक स्थलों व पर्यटन केंद्रों तक पर्यटक को पहुंचाने के लिए इन स्थलों को विश्व मानचित्र पर नहीं उकेर पाए हैं। उन्होंने कहा कि आज युवा गांव की ओर आने को तैयार हैं, लेकिन उनके लिए सरकार बेहतर वातावरण तैयार नहीं कर पा रही है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में पाठ्यक्रम में एकरूपता लाए जाने, विभागीय ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन और नियमों को निजी शिक्षण संस्थानों में सख्ती से पालन कराए जाने पर जोर दिया।
विज्ञापन
शुक्रवार को अमर उजाला से वार्ता करते हुए प्रदेश के पूर्व मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा कि गांवों के आर्थिक विकास को लेकर बृहद कार्ययोजना दूरगामी व सीमांत गांवों को ध्यान में रखकर तैयार करनी होगी। इसमें तीर्थाटन, पर्यटन व सांस्कृतिक विरासत को संजोए जाने की आभा अलग नजर आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पलायन आयोग बनाया है। इसमें नियंत्रण की बात को कहीं तवज्जो नहीं दी गई है। उसका औचित्य क्या है, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। आयोग को कोई संवैधानिक दर्जा नहीं दिया गया है। इसका कार्यकाल क्या होगा? क्या इसकी सिफारिशें सरकार मानेगी? इन सब बातों को लेकर नजरिया साफ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में नीति आयोग ही संवैधानिक है। प्रदेश सरकार पलायन को थामने की दिशा में गंभीर है तो पलायन आयोग की सिफारिशें नीति आयोग को सौंपी जानी चाहिए। गांववासी ने कहा कि हम मिलम, गुंजी-कुट्टी, दारमा, नीती घाटी, प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के प्रहरी गांवों तक सड़क सहित अन्य सुविधाएं पहुंचाने में असफल रहे हैं। चारधाम यात्रा भी भगवान भरोसे ही चल रही है। प्रदेश के अन्य मठ, मंदिरों, ऐतिहासिक स्थलों व पर्यटन केंद्रों तक पर्यटक को पहुंचाने के लिए इन स्थलों को विश्व मानचित्र पर नहीं उकेर पाए हैं। उन्होंने कहा कि आज युवा गांव की ओर आने को तैयार हैं, लेकिन उनके लिए सरकार बेहतर वातावरण तैयार नहीं कर पा रही है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में पाठ्यक्रम में एकरूपता लाए जाने, विभागीय ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन और नियमों को निजी शिक्षण संस्थानों में सख्ती से पालन कराए जाने पर जोर दिया।
विज्ञापन