फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   No longer working for the military

अफसरों को नहीं सेना की जरूरत

Tue, 02 Jul 2013 06:16 PM IST
उत्तरकाशी/ब्यूरो
उत्तरकाशी/ब्यूरो Updated Tue, 02 Jul 2013 06:16 PM IST
विज्ञापन
No longer working for the military

आपदा की चपेट में आए उत्तराखंड में बचाव कार्यों के लिए उतरे सेना और आईटीबीपी के जवानों ने लोगों के बीच तेजी से राहत पंहुचाकर नई उम्मीद पैदा की थी, लेकिन प्रशासन को शायद यह नागवार गुजर रहा है।

विज्ञापन


रेस्क्यू अभियान के बाद जब सेना बाढ़ में तबाह हुई परियोजनाओं की मेंटेनेंश पर जुटी हुई है तो प्रशासन ने सेना की मदद लेने से इंकार कर दिया है।

दूसरी ओर सूत्रों की माने तो ठेकेदार और कुछ अफसरों की मिलीभगत से आपदा में मिले बजट को मनमाने ढंग से ठिकाने लगाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जल्द राहत के लिए सेना का सहयोग लिया जाना चाहिए।
विज्ञापन


16 व 17 जून की आपदा के बाद पूरे उत्तरकाशी जिले में अफरा-तफरी मची थी। ऐसे समय में जब सरकारी तंत्र कहीं नजर नहीं आ रहा था तब आईटीबीपी की 12वीं वाहिनी तथा सेना की नरेंद्रनगर और रायवाला आर्टिलरी की दो यूनिट, 5 गढ़वाल राइफल्स हर्षिल तथा 54 इंजीनियर्स बरेली के जवान उम्मीद की किरण बनकर नजर आने लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


सेना ने हेलीकाप्टरों और जोखिम भरे जमीनी रास्तों से हर्षिल, भटवाड़ी और मनेरी में हजारों यात्रियों को सुरक्षित निकाला। यह वह समय था जब ना सरकारी मंत्री और ना अफसरान ही कही नजर आ रहे थे।

अब जबकि सेना ने प्रभावितों को सकुशल बाहर निकाल लिया है और आम ग्रामीणों के लिए मदद करना चाहती है तो प्रशासन को यह नागवार गुजर रहा है। सेना आपदा में तबाह हुई उत्तरकाशी जिला मुख्यालय के लिए बनी तेखला पेयजल योजना को दुबारा बिछाने के कार्य में जुटी हुई थी।

दो दिन में ही सेना ने तीन सौ मीटर से भी ज्यादा क्षतिग्रस्त पड़ी हुई पाइप लाइन को दुबारा से बिछा दिया। सेना की कार्यशैली से आम जनता को भी जल्द राहत की उम्मीदें बढ़ने लगी, लेकिन शायद ठेकेदारों व अधिकारियों को यह रास नहीं आया।

यही वजह है कि सेना के जवानों के लिए अब उत्तरकाशी में कोई काम न होने की बात कहते हुए लौटा दिया गया।

काम में नहीं मिला सहयोग
सेना के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पेयजल लाइन बिछाने के कार्य में ठेकेदार और विभाग ने अड़ंगेबाजी की। डीएम ने लिखित तौर पर सेना के लिए अब जिले में कोई टास्क न होने की बात कहते हुए उन्हें लौटने को कहा।


'इन हालात में व्यवस्थाएं बहाल करने में सेना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सेना के लिए प्रशासन को व्यवस्था नहीं करनी होती। सिर्फ टास्क निर्धारित कर उस काम को पूरा करने के आदेश देने होते हैं।'

आरएस जमनाल, सेवानिवृत्त मेजर

'सरकारी विभाग ठेकेदारी और कमीशनखोरी की वजह से सेना के जवानों से काम नहीं लेना चाहते। पेयजल लाइन के काम से इसीलिए सेना को हटाया गया। सेना की इंजीनियरिंग कोर को काम सौंपे जाएं तो व्यवस्थाएं बहाल होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।'
रवींद्र जोशी, पालिका सभासद ज्ञानसू

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed