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एक महीना बीता, लेकिन तस्वीर अभी भी उतनी ही भयावह

Tue, 16 Jul 2013 11:15 AM IST
अजित सिंह राठी
अजित सिंह राठी Updated Tue, 16 Jul 2013 11:15 AM IST
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no change after one month of floods

एक महीना बीता लेकिन पहाड़ के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य नहीं हो सका। पीडब्लूडी के सीमित संसाधन, बीआरओ की सुस्ती जनता की ‘राहों’ पर भारी पड़ रही है। दो सौ से ज्यादा सड़कें अभी भी बंद हैं।

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सौ से ज्यादा पुल आवागमन के लिए पूरी तरह ठप हैं। जिन सड़कों को खोलने का दावा किया जा रहा है वहां पर भी स्थिति विपरीत ही है।

विभाग दावा कर रहा है कि इन मार्गों को 31 जुलाई तक खोल दिया जाएगा। लेकिन व्यावहारिक रूप से यह दावा मुमकिन नहीं लगता। सरकार भी इसकी समयसीमा सितंबर तक मानकर चल रही है। पिछले एक महीने में दावे-प्रतिदावे तो बहुत हुए लेकिन जमीन पर कुछ नजर नहीं आया।
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225 पुल क्षतिग्रस्त
आपदा में 225 पुल क्षतिग्रस्त हुए थे, यहां पर भी विभाग 135 पुलों पर आवागमन चालू कराने की दावा कर रहा है। शेष काम के लिए यहां भी 31 जुलाई की तारीख मुकर्रर है। लेकिन व्यावहारिक तौर पर यह कैसे संभव होगा इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल नहीं है।

पीएमजीएसवाई की 318 क्षतिग्रस्त सड़कों में से 275 खोलने का दावा किया गया है। शेष को तीन महीने में खोलने की बात कही जा रही है। लेकिन छह महीने से पहले खुलने के आसार नजर नहीं आते। बागेश्वर में कपकोट के पास रिखाड़ी बाछम के पास ढाई किलोमीटर लंबी सड़क बह गई, बह गई सड़कों के पुनर्निर्माण में बीआरओ और एनएच से लेकर पीडब्लूडी जैसे बड़े महकमे फेल हो रहे हैं तो पीएमजीएसवाई की बिसात ही क्या है।


चारों धाम से जुड़ी सड़कों को बनाना चुनौती
राज्य में शिवालिक प्रोजेक्ट के अधीन चारधाम गंगोत्री, यमनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ने वाले 647 किलोमीटर नेशनल हाईवे और 346 किलोमीटर स्टेट रोड हैं। आपदा ने मार्गों को बेहद नुकसान पहुंचाया है। जनजीवन को सामान्य करने के लिए इन सड़कों का बनना बेहद जरूरी है लेकिन माना जा रहा है कि इन्हें बनाने में साल भर तक भी लग सकता है।

उत्तरकाशी जिले में तो पैदल व खच्चर मार्ग भी बीआरओ के पास हैं। उत्तरकाशी व रुद्रप्रयाग के डीएम बीआरओ को नोटिस भी जारी कर चुके हैं लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।

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