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उत्तराखंड पर क्यों उतरा कुदरत का गुस्सा

Wed, 19 Jun 2013 05:33 PM IST
कोटद्वार, दुगड्डा/ब्यूरो
कोटद्वार, दुगड्डा/ब्यूरो Updated Wed, 19 Jun 2013 05:33 PM IST
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Nature caused havoc in Uttarakhand

बादल बरसे, नदियां उफना गईं, बहाव बेकाबू हुआ और उजड़ गए कई आशियाने।

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हर बरसात में सिलगाड़, लंगूरगाड़, खोह, सुखरो और मालन नदियों समेत बरसाती नालों के किनारे बसी नगर-भाबर और दुगड्डा की बस्तियों की यही कहानी है।

आपदा में सब कुछ गंवाने के बाद भले ही नदी-नालों को दोषी ठहरा दिया जाता हो, लेकिन इसके पीछे कहीं न कहीं नदी किनारे होने वाली अवैध बसावट ही प्रमुख वजह है।

तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
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पानी का बहाव रोकते अतिक्रमण
नदी-नालों में अतिक्रमण कर हो रहे निर्माण पानी के बहाव का रास्ता रोकेंगे तो जाहिर तौर पर कुदरत की नाराजगी भी तबाही की राह खोलेगी। अतिक्रमण के चलते नदियों के फाट लगातार घट रहे हैं।
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खोह, मालन, सुखरो, पनियाली गदेरे की चौड़ाई कई जगह आधी रह गई है। क्षेत्र के बरसाती नाले तो कई जगह नाली ही बनकर रह गए हैं। यही वजह है कि हल्की बारिश में भी ये उफना जाते हैं और तबाही का सबब बनते हैं।

नदी से सटाकर बनाई मकानों की नींव
खोह नदी में गाड़ीघाट से झूलापुल तक एक तरफ से पूरा अतिक्रमण हो चुका है। कई लोगों ने यहां पर भवनों के लिए बनाए आंगन कई फीट नदी की ओर कर दिए हैं। गिवईं स्रोत में कई मकानों की नींव नदी से सटाकर बनाई गई है।

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डिग्री कालेज के पास बहने वाले बरसाती नाले पर भी शिवपुर, जौनपुर, सिताबपुर, देवी रोड आदि क्षेत्रों में नाले से सटाकर भवन-दुकानें बना दी गई हैं। सिम्मलचौड़ में भी ऐसी ही स्थिति है।

हाई अलर्ट पर हावी, लापरवाही
गत वर्ष 16 अगस्त की रात 09:20 बजे सिलगाड़ के उफान पर आने के बाद दुगड्डा के मोती बाजार और कमला नेहरू मार्ग पर कई घरों में पानी भर गया था। यहां अधिकांश घरों की नींव नदी पर ही डाली गई है।

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‘अमर उजाला’ ने रात 09:30 बजे एसडीएम अनिल गर्ब्याल को फोन पर जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस और राजस्व कर्मी मौके पर पहुंचे। फौरन दुगड्डा के नदी किनारे बसे घरों को खाली कराया गया, जबकि कोटद्वार में भी हाई अलर्ट जारी किया गया था।

पहले भी सामने आया संकट
गत वर्ष सनेह क्षेत्र में कई घरों-दुकानों में खोह नदी और क्षेत्र में बहने वाले बरसाती नालों का पानी भर गया था। तब नालों में अतिक्रमण की वजह से बहाव को रास्ता न मिलने को इसकी वजह बताया गया। इसी तरह सूर्यनगर में पिछले साल कई घरों में भारी मलबा, पानी घुस गया था। यहां दर्जनों मकान बरसाती नाले से बिलकुल सटाकर बनाए गए हैं। इससे ऊपर भी कई जगह नाले पर अतिक्रमण हुआ है।

संभलने का मौका नहीं देतीं नदियां
नगर की अधिकांश नदियों के स्रोत आसपास की पहाड़ियों पर हैं। इनमें कईं बरसाती नाले भी जुड़ जाते हैं। कई बार कोटद्वार में बारिश नहीं होती, जबकि पहाड़ों पर बादल जमकर बरस चुके होते हैं। ऐसे में नालों का पानी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा देता है। यह पानी जब कोटद्वार पहुंचता है तो किसी को संभलने का भी मौका नहीं देता।

नहीं दिया ध्यान तो होगा नुकसान
कोटद्वार के सिम्मलचौड़, काशीरामपुर, सनेह, दुगड्डा के मोती बाजार, कमला नेहरू मार्ग में अतिक्रमण पर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो बरसात में यह दिक्कत हर बार परेशान करेगी।

"संबंधित स्थानों पर कई लोगों की भूमिधरी की जमीन है। नदी किनारे सिंचाई विभाग की ओर से सुरक्षा दीवार बनाई जा रही है। प्रशासन के स्तर पर कार्रवाई होती है। कहीं शिकायत मिलेगी तो जरूर कदम उठाया जाएगा।"
-अनिल गर्ब्याल, एसडीएम, कोटद्वार

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