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Nainital News: महिला महाविद्यालय की शोधार्थी ने जलीय कवक की छह नई प्रजाति खोजी
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महिला महाविद्यालय की शोधार्थी भानु प्रिया।
हल्द्वानी। महिला डिग्री कॉलेज की शोधार्थी भानु प्रिया ने कुमाऊं में कवक की छह नई प्रजातियों की खोज की है। कवक एंजाइमों का उत्पादन कर कार्बनिक पदार्थों के अपघटक रूप में बहुत महत्व रखते हैं जो जटिल पौधों को सरल अकार्बनिक अणुओं में तोड़ने में मदद करते हैं। यह प्रक्रिया जलीय जीवों को पोषक तत्व प्रदान करती है और कार्बन को वापस पारिस्थितिकी तंत्र में मुक्त करती है।
वनस्पति विज्ञान विभाग की शोधार्थी भानु प्रिया एक साल से हिमालय की तलहटी में उगने वाले रिपेरियन पौधों से विभिन्न जल-जनित को निडियल कवकों की खोज और जैव-संभावना पर शोध कर रही हैं। उनका दावा है कि उन्होंने हल्द्वानी में काठगोदाम गौला डैम, कालाढूंगी और जिम कार्बेट के आसपास बहने वाले मीठे जल के स्रोतों में अध्ययन कर कवक की छह नई प्रजातियां खोजी हैं। इनमें ट्राइकोक्लैडियम एंजेलिकम, रोल्डन, होनरुबिया, सिन्नेमेटोफोरा आदि प्रमुख हैं।
अभी तक कुमाऊं में कवक की 86 प्रजातियां खोजी जा चुकी हैं। भानु का कहना है कि इस कार्य को वह अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन के लिए प्रयासरत हैं। भविष्य में वह कुमाऊं में पाए जाने वाले कवक का डेटा बेस तैयार करेंगी जो कि नवाचारी रिसर्च होगा। शोध असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सरस्वती बिष्ट के निर्देशन में किया।
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बिना केंचुए के भी बढ़ सकती है मिट्टी की उर्वरकता
वनस्पति विज्ञान की शोधार्थी सोनाक्षी बेरी ने वर्मी कंपोस्ट पर शोध किया है। उन्होंने अलग-अलग प्रकार की मिट्टी, जैविक पदार्थ आदि के मिश्रण को मिलाकर पौधों पर रिसर्च कर पाया कि केंचुए रहित मिट्टी में भी जैविक पदार्थ मिलाकर मिट्टी की उर्वरकता को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए मिट्टी, कोयला और लकड़ी की राख को एकत्र कर मिश्रण तैयार किया। दो महीने तक पौधों का निरीक्षण किया तो देखा कि आम पौधे से ज्यादा इस पौधे की ग्रोथ हो रही है और इसमें फंगस भी नहीं लगा। उनका कहना है कि घरों में लोग आसानी से इसका उपयोग कर अच्छी खाद तैयार कर सकते हैं। बाजार से कैमिकल युक्त खाद से बचाव के लिए यह रिसर्च किसानों के लिए लाभकारी है। बताया कि आगे जाकर वह पौधों के फलों पर भी इसी तरह का शोध करेंगी।
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वनस्पति विज्ञान विभाग की शोधार्थी भानु प्रिया एक साल से हिमालय की तलहटी में उगने वाले रिपेरियन पौधों से विभिन्न जल-जनित को निडियल कवकों की खोज और जैव-संभावना पर शोध कर रही हैं। उनका दावा है कि उन्होंने हल्द्वानी में काठगोदाम गौला डैम, कालाढूंगी और जिम कार्बेट के आसपास बहने वाले मीठे जल के स्रोतों में अध्ययन कर कवक की छह नई प्रजातियां खोजी हैं। इनमें ट्राइकोक्लैडियम एंजेलिकम, रोल्डन, होनरुबिया, सिन्नेमेटोफोरा आदि प्रमुख हैं।
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अभी तक कुमाऊं में कवक की 86 प्रजातियां खोजी जा चुकी हैं। भानु का कहना है कि इस कार्य को वह अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन के लिए प्रयासरत हैं। भविष्य में वह कुमाऊं में पाए जाने वाले कवक का डेटा बेस तैयार करेंगी जो कि नवाचारी रिसर्च होगा। शोध असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सरस्वती बिष्ट के निर्देशन में किया।
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बिना केंचुए के भी बढ़ सकती है मिट्टी की उर्वरकता
वनस्पति विज्ञान की शोधार्थी सोनाक्षी बेरी ने वर्मी कंपोस्ट पर शोध किया है। उन्होंने अलग-अलग प्रकार की मिट्टी, जैविक पदार्थ आदि के मिश्रण को मिलाकर पौधों पर रिसर्च कर पाया कि केंचुए रहित मिट्टी में भी जैविक पदार्थ मिलाकर मिट्टी की उर्वरकता को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए मिट्टी, कोयला और लकड़ी की राख को एकत्र कर मिश्रण तैयार किया। दो महीने तक पौधों का निरीक्षण किया तो देखा कि आम पौधे से ज्यादा इस पौधे की ग्रोथ हो रही है और इसमें फंगस भी नहीं लगा। उनका कहना है कि घरों में लोग आसानी से इसका उपयोग कर अच्छी खाद तैयार कर सकते हैं। बाजार से कैमिकल युक्त खाद से बचाव के लिए यह रिसर्च किसानों के लिए लाभकारी है। बताया कि आगे जाकर वह पौधों के फलों पर भी इसी तरह का शोध करेंगी।

महिला महाविद्यालय की शोधार्थी भानु प्रिया।