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शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य के अभाव में हो रहा पलायन
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
Updated Sun, 11 Dec 2016 11:11 PM IST
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अभाव में हो रहा पलायन
- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। समाजशास्त्र परिषद उत्तराखंड के सहयोग से कुविवि के डीएसबी परिसर के समाजशास्त्र विभाग ने रविवार को हिमालयी राज्यों के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन विषयक सेमीनार का आयोजन किया। एमएसडब्लू प्रोग्राम के तहत हरमिटेज भवन में हुए सेमीनार में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य व बुनियादी सुविधाओं की कमी पलायन का सबसे बड़ा कारण हैं। देश के सीमांत क्षेत्रों से स्थानीय जनता का चले जाना बेहद चिंता का विषय है।
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मुख्य वक्ता एवं राजस्थान विवि के पूर्व कुलपति प्रो. केएल शर्मा ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। पलायन की वजह से सीमांत क्षेत्र तो खाली हो ही रहे हैं, वहीं वहां की आर्थिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने इस मामले में झारखंड का उदाहरण भी दिया। उन्होंने देश में पलायन की स्थितियों पर अपना शोध पत्र भी प्रस्तुत किया।
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विशिष्ट अतिथि आईसीएसएसआर नई दिल्ली के निदेशक डॉ. सीएस सौन ने कहा कि छोटे राज्यों से पलायन अधिक हो रहा है। उत्तराखंड के बारे में उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में 53 फीसदी पुरुष व 47 फीसदी महिलाओं ने जबकि 2011 में 48 फीसदी पुरुष तथा 52 फीसदी महिलाओं ने पहाड़ से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन किया। पलायन की मुख्य वजह गुणात्मक शिक्षा की कमी, आर्थिक तंत्र का मजबूत न होने के साथ ही स्वास्थ्य व कृषि के क्षेत्र में मिलने वाली सुविधाओं की कमी होना है। उन्होंने पलायन रोकने के लिए ठोस नीति बनाने पर जोर दिया।
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अध्यक्षीय संबोधन में एमडी विवि रोहतक के समाजशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. बीके नागला ने आर्थिक तंत्र को मजबूत बनाने पर जोर दिया। डीएसबी परिसर के निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता ने कहा कि पर्यावरणीय कारणों के साथ ही उत्तराखंड में रोजगारपरक विषयों की कमी भी पलायन की मुख्य वजह है।
समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. देवेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड में जरूरत के मुताबिक सुविधाएं न मिलने की वजह से लोग पलायन कर रहे हैं। इस दौरान एसएयूके के अध्यक्ष एवं कला संकायाध्यक्ष प्रो. भगवान सिंह बिष्ट, प्रो. बीडी दानी, प्रो. इंदु पाठक, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. पदम एस बिष्ट, सुचेतन साह, प्रो. प्रियंका नीरज रुबाली, आनंद रावत, जगत सिंह कफलिया समेत एमएसडब्लू प्रोग्राम से जुड़े विद्यार्थी व शोधार्थी मौजूद थे। संचालन प्रो. ज्योति जोशी ने किया।