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तीन हेक्टेयर के तालाब से प्यास बुझाएंगे वन्यजीव
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रामनगर सीतावनी में बनाया गया तालाब।
- फोटो : RAMNAGAR
रामनगर (नैनीताल)। फायर सीजन शुरू होते ही जंगलों में पानी के स्रोत सूखने के साथ वन्यजीवों के लिए पानी का संकट हो जाता है। कई दफा पानी नहीं मिलने पर पशु आबादी तक पहुंच जाते हैं। इसे देखते हुए वन विभाग ने सीतावनी में तीन हेक्टयेर का तालाब विकसित किया गया। इससे गर्मी में पशु प्यास आसानी से बुझा सकेंगे।
रामनगर वन प्रभाग के सीतावनी गेस्ट हाउस से करीब तीन किलोमीटर पहले घने जंगल में कोटा और कोसी रेंज के रेंजर ललित जोशी ने पांच हेक्टेयर का 20 लाख लीटर क्षमता का तालाब विकसित कराया है, जो पानी के स्त्रोत के किनारे है। स्रोत और काली गाड़ नदी से तालाब में पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे उसमें पर्याप्त पानी रहेगा। इसके अलावा फायर सीजन के दौरान वनाग्नि पर काबू पाने के लिए विभाग इस तालाब का इस्तेमाल कर सकता है। विभाग ने तालाब के आसपास पांच चौड़ों को विकसित किया है, ताकि यहां पर वन्यजीव घूम सके।
पीसीसीएफ कर चुके हैं तारीफ
चार माह पहले वन विभाग के मुखिया पीसीसीएफ जयराज ने भी इस तालाब का भ्रमण किया। उन्होंने अधिकारियों को इस तरह के और भी तालाब विकसित करने के निर्देश दिए। सीतावनी की तर्ज पर अन्य वन प्रभागों में इस तरह के तालाब विकसित करने से वन्यजीवों के लिए पानी का संकट नहीं होगा।
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तीन हेक्टेयर में बनाए तालाब से वन्यजीवों के सामने पानी का संकट नहीं होगा। तालाब से वन्यजीव आसानी से अपनी प्यास बुझा सकेंगे। भविष्य में तालाब को और विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।
चंद्रशेखर जोशी, डीएफओ रामनगर वन प्रभाग
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रामनगर वन प्रभाग के सीतावनी गेस्ट हाउस से करीब तीन किलोमीटर पहले घने जंगल में कोटा और कोसी रेंज के रेंजर ललित जोशी ने पांच हेक्टेयर का 20 लाख लीटर क्षमता का तालाब विकसित कराया है, जो पानी के स्त्रोत के किनारे है। स्रोत और काली गाड़ नदी से तालाब में पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे उसमें पर्याप्त पानी रहेगा। इसके अलावा फायर सीजन के दौरान वनाग्नि पर काबू पाने के लिए विभाग इस तालाब का इस्तेमाल कर सकता है। विभाग ने तालाब के आसपास पांच चौड़ों को विकसित किया है, ताकि यहां पर वन्यजीव घूम सके।
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पीसीसीएफ कर चुके हैं तारीफ
चार माह पहले वन विभाग के मुखिया पीसीसीएफ जयराज ने भी इस तालाब का भ्रमण किया। उन्होंने अधिकारियों को इस तरह के और भी तालाब विकसित करने के निर्देश दिए। सीतावनी की तर्ज पर अन्य वन प्रभागों में इस तरह के तालाब विकसित करने से वन्यजीवों के लिए पानी का संकट नहीं होगा।
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तीन हेक्टेयर में बनाए तालाब से वन्यजीवों के सामने पानी का संकट नहीं होगा। तालाब से वन्यजीव आसानी से अपनी प्यास बुझा सकेंगे। भविष्य में तालाब को और विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।
चंद्रशेखर जोशी, डीएफओ रामनगर वन प्रभाग