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Haldwani Violence: जंगलात की जमीन से हटाए 500 से अधिक धार्मिकस्थल, फिर बनभूलपुरा में बवाल क्यों?

Wed, 14 Feb 2024 02:02 PM IST
हीरा मेहरा विजेंद्र श्रीवास्तव
विजेंद्र श्रीवास्तव Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 14 Feb 2024 02:02 PM IST
सार

जंगलात वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रहा है। इसमें पांच सौ से अधिक मजार समेत दूसरी धार्मिक को हटाया जा चुका है। इस दौरान टीमों को हिंसा का सामना नहीं करना पड़ा है। हल्द्वानी में पहले से सील हो चुके दो स्थलों को ध्वस्त करने पर हिंसा हुई। 

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Why the ruckus in Banbhoolpura if More than 500 religious places removed from forest land in haldwani
Haldwani Violence - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जंगलात 10 महीनों से वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रहा है। इसमें पांच सौ से अधिक मजार समेत दूसरी धार्मिक अवसंरचना को हटाया जा चुका है। हजारों एकड़ वन भूमि को भी अतिक्रमण से मुक्त किया गया है। कुछ छिटपुट विरोध और तनाव को को छोड़ दें, तो टीमों को उग्र विरोध और हिंसा का सामना नहीं करना पड़ा है जबकि हल्द्वानी में पहले से सील हो चुके दो स्थलों को ध्वस्त करने पर हिंसा हुई। ऐसे में सरकारी महकमों पर विरोध की तीव्रता का पूरी तरह आकलन न कर पाने या स्थिति को भाप न पाने को लेकर भी सवाल उठ रहा है।

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वन विभाग की जमीन पर बड़े स्तर पर अतिक्रमण हुआ है। कई धार्मिक अवसंरचनाएं भी बना ली गई। यहां पर बाहरी लोगों का भी आनाजाना लगा रहता था। इसे लेकर लंबे समय से विभाग आंख बंद किए रहा। पिछले साल अप्रैल में अतिक्रमण हटाने का फैसला किया गया। इसके बाद पूरे प्रदेश में एक साथ अभियान शुरू किया गया। इसमें कई को तो वन विभाग ने हटाया तो कुछ लोग कार्रवाई होती देख खुद संरचना को हटाने के लिए आगे आए। अभियान के तहत प्रदेश में वन भूमि पर बनी 526 मजार और 49 मंदिरों को हटाया गया है। इसके अलावा मस्जिद और चार मदरसों को हटाया गया है।

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वन विभाग ने कब्जाई 3287 एकड़ वन भूमि को भी अतिक्रमण से मुक्त कराया है। अभियान के दौरान बड़े स्तर से धार्मिक अवसंरचना को हटाया गया, लेकिन कहीं पर उपद्रव या हिंसात्मक विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। इसके पीछे अधिकारी जंगल का इलाका होने और लोगों का दबाव कम होना बताते हैं, इसके अलावा अभियान के लिए चुने गए समय, विभिन्न प्रभागों के साथ दूसरे विभागों के बीच बेहतर समन्वय और हर पहलू को समझते हुए कार्रवाई करने की योजना बनाना भी शामिल रहा है।
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वन विभाग अभियान की तैयारी में
तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी के पास के इलाके में अतिक्रमण को हटाने के लिए तैयारी कर रहा है। इस इलाके में हाल ही में कई अवैध निर्माण होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि अभियान को लेकर व्यापक तैयारी कर ली गई थी पर हल्द्वानी में हुए उपद्रव के बाद दूसरी एजेंसियों के व्यस्त होने के कारण इसे रोक दिया गया। अधिकारियों के अनुसार हल्द्वानी के हालात पूरी तरह सामान्य होने के बाद अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया जाएगा।

खाली कराई जमीन को बचाने के लिए बजट का इंतजार
वन विभाग ने जंगल के अलावा रामपुर रोड जैसी जगहों से भी अतिक्रमण को हटाया है यहां पर विभाग की बेशकीमती जमीन है। जहां से कब्जा हटाया गया है उस पर दूसरी बार कब्जा न हो उसको बचाने के लिए पर्याप्त बजट का इंतजार किया जा रहा है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ हिमांशु कहते हैं कि जो भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है उस पर प्लांटेशन, आबादी के पास वाले में खाई खुदान और रामपुर रोड जैसी वन भूमि को सुरक्षित करने के लिए दीवार बनाने की योजना बनाई गई है। इसका प्रस्ताव भी मुख्यालय को भेजा गया है। इसके लिए जो बजट मिला था, उससे प्लांटेशन का काम हुआ है। शेष बजट मिलते ही कार्य किया जाएगा।

पिछले साल अप्रैल से वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। रही बात विरोध की तो छिटपुट मामलों को छोड़कर सामान्य तौर पर कब्जा हटाया गया। विरोध न होने के पीछे जंगल का एरिया होना और आबादी कम होना है। साथ ही बेहतर समन्वय समेत अन्य सभी बातों को रखते हुए अभियान चलाया गया है। बाकी जगहों पर लोगों के आर्थिक और निजी हित भी जुड़े होते हैं। रही बात अतिक्रमित भूमि पर दोबारा कब्जे से बचाने की तो उसके लिए कुछ बजट दिया गया है। जल्द ही दीवार आदि बनाने के लिए बजट दिया जाएगा।
-डॉ. पराग मधुकर धकाते, मुख्य वन संरक्षक व नोडल अधिकारी अतिक्रमण हटाओ अभियान

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