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जैसे भी हो, कुर्सी मिलनी चाहिए
हरीश पांडे
Updated Tue, 18 Jul 2017 02:37 AM IST
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राजनीति
- फोटो : demo
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राज्य सहकारी बैंक की तर्ज पर ही राज्य सहकारी दुग्ध संघ में भी तोड़फोड़ कर भाजपा ने कब्जा कर लिया। अविश्वास प्रस्ताव लाकर कांग्रेस के अध्यक्ष को बाहर का रास्ता दिखाने वाली भाजपा ने निर्वाचित सदस्यों में से किसी निदेशक को अध्यक्ष बनाना सही नहीं समझा।
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कुछ दिन पहले ही भाजपा ने राज्य सहकारी बैंक के रिक्त अध्यक्ष पद भाजपा नेता की ताजपोशी कराई थी। बैंक के प्रबंध मंडल में हालांकि कांग्रेस का वर्चस्व था, लेकिन निदेशकों को अपने पाले में करने में भाजपा को सफलता मिली थी।
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बैंक में भी भाजपा ने निर्वाचित सदस्य की बजाय नामित सदस्य को अध्यक्ष बनाया था। राज्य सहकारी दुग्ध संघ में भी यही हुआ। सात सदस्य के प्रबंध निदेशक मंडल में छह सदस्य कांग्रेस के थे।
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निर्वतमान अध्यक्ष अर्जुन सिंह रौतेला पुराने कांग्रेसी हैं और पूर्व सहकारी मंत्री यशपाल आर्य के खासे नजदीक भी। आर्य अब कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में पहुंचने के बाद सिंचाई मंत्री हैं। सूत्रों के मुताबिक आर्य की इस समय अर्जुन से खासी दूरी है और इसकी वजह यह भी है कि अर्जुन अभी तक कांग्रेस में ही डटे हुए हैं।
दूसरी ओर, नामित को अध्यक्ष बना कर भाजपा ने यह भी साबित कर दिया है कि सारा खेल कुर्सी का ही है। राजवीर सिंह को बोर्ड में नामित करने के लिए बाकायदा सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने ही पूरी कोशिश की। हो यह भी सकता था कि अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने के बाद रिक्त अध्यक्ष पद पर बोर्ड के किसी निर्वाचित सदस्य को ही बैठाया जाता।
संघ के अध्यक्ष पद पर जिसकी ताजपोशी हुई है, उसके खिलाफ कांग्रेस केसदस्य पहले ही शिकायत कर चुके हैं। यहां तक की शिकायत से संबंधित मामला हाइकोर्ट भी पहुंचा और इसमें जांच भी जारी है। भाजपा का यह रुख अन्य कई जगह भी देखने को मिला।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को भंग करने की तमाम कोशिश होती रही। यहां तक की हाइकोर्ट के आदेश पर बहाल हुई समिति को भी भंग कर दिया गया था। यही हाल कृषि मंडी समितियों का रहा। इन दोनों मामलों में भाजपा को हाइकोर्ट के रुख के कारण बैक फुट पर आना पड़ा।