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ये कैसा विकास, गांवों का वजूद खत्म करने की तैयारी 

Sat, 16 Dec 2017 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी। Updated Sat, 16 Dec 2017 02:20 AM IST
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what kind of development is this
हल्‍द्वानी का भगवानपुर जयसिंह गांव। - फोटो : अमर उजाला
नगर निगम में गांव को शामिल करने के लिए मानकों का पालन नहीं किया गया है। गांव को नगर निगम में शामिल करने के लिए कृषि क्षेत्र को छोड़कर भी कई नियम हैं। ये नियम कहते हैं कि गांव में राजस्व आय अर्जित करने के गुण होने चाहिए। गांव में शहरी गुण विद्यमान हों और क्षेत्र का स्थानीय महत्व हो। 
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इसके ठीक विपरीत भगवानपुर जयसिंह तीनों नियमों का पालन नहीं करता है। इसके बाद भी इसे नगर निगम में शामिल कर दिया गया। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने भगवानपुर जयसिंह गांव का जायजा लिया तो ग्रामीणों का कहना था नगर निगम उनके गांव में 10 साल में भी सुविधाएं विकसित नहीं कर पाएगा।
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नियमों को ताख पर रखकर उनके गांव को नगर निगम की सीमा में शामिल किया गया। गांव में करीब 55 प्रतिशत खेती है। कहा कि गांव में सड़कें, पानी निगम क्षेत्र की तुलना में बेहतर हैं।
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नगर निगम अपने क्षेत्र में न तो सीवर की सुविधा दे पाया है और न ही कूड़ा उठाने की व्यवस्था। थोड़ी सी बारिश में नगर निगम के कई वार्डों में जलभराव हो जाता है। निगम का विस्तार भाजपा ने सिर्फ अपने राजनैतिक फायदा उठाने के लिए किया। किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया। 
 
अधिकारी बताएं उनके पास कितने संसाधन
 नगर निगम गांव का क्या भला करेगी ये तो वही बात हो गयी जैसे चिराग तले अंधेरा। अपना शहर सुधार नहीं सकते और चले हैं गांव की ओर। भाजपा ने राजनीति चमकाने के लिए निगम में इसे शामिल कर लिया है। 
- बिशन दत्त भट्ट

 निगम के अधिकारी बताएं कि क्या उनके पास इतने संसाधन हैं, जिनसे गांव का विकास हो सके। इतने बड़े पैमाने पर गांवों को निगम में लेने से अव्यवस्था हो जाएगी। गांव को निगम में धीरे-धीरे शामिल किया जाता तो बेहतर होता। 
- एसी पाठक 

 गांव में सारी सुविधाएं हैं, निगम हल्द्वानी में पथ प्रकाश की व्यवस्था ठीक ढंग से कर ले वही काफी है। हमें कतई निगम में शामिल नहीं होना, दफ्तरों के चक्कर बुढ़ापे में नहीं लगा सकते। 
- एनबी पाठक

पानी, बिजली, सड़क ये सब सुविधाएं दुरुस्त हैं। अब अगर निगम आता है तो सबका सत्यानाश होना तय है। अधिकारी और नेता चांदी काटेंगे। पैसे वालों का गलत काम भी सही हो जाएगा।
-आनंद बल्लभ पाठक

वार्ड 18 में पेयजल तक नहीं पहुंचा पाया नगर निगम 
वार्ड 18 बनभूलपुरा में कई घरों में पेयजल लाइन नहीं पहुंची है। सैकड़ों लोग सार्वजनिक नल से पानी भरते हैं। कई गलियों में 30 साल बाद भी सीवर लाइन नहीं डाली गई। अतिक्रमण के कारण नालियां चोक हैं। इन नालियों में सीवर बह रहा है। 

शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने वार्ड 18 बनभूलपुरा का जायजा लिया। लोगों ने बताया कि गलियों में पेयजल लाइनें नहीं हैं। वे 50 मीटर से 100 मीटर दूर सार्वजनिक नल से पानी भरते हैं। नालियों में अतिक्रमण है। सीवर लाइन नहीं होने से लोग अपने घर का सीवर नालियों में बहा रहे हैं। सड़कें टूटी हैं, कोई उनकी नहीं सुन रहा है। नजूल में बताकर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना से भी बाहर रखा गया है।

क्या कहते हैं वार्ड 18 के निवासी - 
वार्ड की हालत बहुत खराब है। 30 साल हो गए हैं। कई बार बोर्ड में सीवर, पेयजल लाइन बिछाने को लेकर पत्र दिया। प्रस्ताव रखा। लेकिन अभी तक न तो सीवर की लाइन वार्ड में पड़ी है और न ही पेयजल लाइनें। सफाई कर्मचारियों की कमी के कारण नालियाें की सफाई नहीं हो रही है।

- शाहजहां बेगम, पार्षद

नालियों पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। कई बार मेयर और नगर आयुक्त से शिकायत की गई। कोई वार्ड को देखने नहीं आता। - मो. रियाज 
वार्ड में सफाई नहीं हो रही है। नालियों में सीवर फेंका जा रहा है। सड़कें खराब हैं। 30 साल से हम परेशान हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।  
- मौ. लईक 

पानी की बहुत समस्या है। 50 मीटर दूर से सार्वजनिक नल से पानी लाना पड़ रहा है। कई सार्वजनिक नल निगम ने सड़क बनाने के दौरान बंद करा दिए। ऐसे निगम का क्या फायदा। सिर्फ टैक्स वसूलने तक सीमित है निगम। 
- सायदा 
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