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गगास की घाटी में पनप रहा है जल संघर्ष

Tue, 23 May 2017 12:47 AM IST
सुधाकर भट्ट 
सुधाकर भट्ट  Updated Tue, 23 May 2017 12:47 AM IST
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Water struggle in the valley of Gagaas
gagas

गगास नदी के जल संग्रहण क्षेत्र में दूनागिरि और आसपास के क्षेत्रों में पानी के लगातार कम होने का असर अब सीधे दिखने लगा है। लोगों के मुताबिक पानी कम हो रहा है और इस हिसाब से उनका जीवन भी बदल रहा है। पानी कम होने के कारण पानी पर अधिकार को लेकर संघर्ष धीरे-धीरे इस पूरे क्षेत्र में पांव पसार रहा है। 

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रतखाल, गर्भमुनि के आश्रम, खोलिया बांज, पांडुकेश्वर से निकलने वाली धाराएं रतखाल में ही गगास को नदी का रूप देती हैं। एक तरफ दूनागिरि का पूरा जल संग्रहण का क्षेत्र है जिससे निकल रही कई धाराएं खेलिया बांज, दूधौली और अन्य कई गांवों को पानी देती हैं।
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दूसरी तरफ इन कई धाराओं में पानी अब लगातार कम होता जा रहा है, जो पानी बचा है उसी पानी को टैब करके गांवों के लोग अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं यही झगड़े की वजह भी बन रहा है। खोलिया बांज से ही पानी को टैब करके दूनागिरि के मंदिर तक ही पहुंचाया गया है।
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दूधौली के आनंद सिंह, रतखाल के ग्राम प्रधान सुरेश शर्मा आदि का कहना है कि मंदिर समिति इस पानी का उपयोग कर रही है तो उसे इस पानी के  संवर्द्धन के लिए भी काम करना चाहिए। इस पानी पर गांव वालों का भी हक होना चाहिए।

ठीक इसी तरह लोग दबी जुबान में यह भी कह रहे हैं कि यहां इस क्षेत्र में एक व्यवसायी ने बोरिंग कर प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पानी का अपना निजी उपयोग करना शुरू कर दिया है। इसी तरह चेरी गांव के पास बने पंपिंग योजना में चार गांवों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर भी झगड़ा है।

इस पूरे क्षेत्र में गगास के सदा बहने वाली 95 प्रतिशत से अधिक की धाराएं सूख गई हैं। लोगों के अपने उपयोग के लिए पानी की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। इसका असर लोगों के जीवन पर भी पड़ रहा है। अधिक पानी वाली फसलों से किनारा कर रहे हैं। 

गांव की शक्ल में नहीं है यह बसावत

कुकूछीना से लेकर नयाल तक की पद यात्रा यह बताने के लिए काफी है कि पानी को बचाने के लोगों का एकजुट हो पाना खासा मुश्किल है। यहां पर घर बहुत दूर-दूर हैं और यही वजह है कि जल संस्थान की ओर से ग्राम सभाओं के लिए पेयजल योजनाएं न के बराबर है।


लोगों के मुताबिक अधिकतर बसावत उन लोगों की है जिनको 60 के दशक में सरकार की ओर से भूमि आवंटित की गई थी इसलिए गांव में घर खासे दूर-दूर और छितरे हुए हैं। 

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