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अलमारी में कैद किताबें, पढ़ने वाला कोई नहीं

Tue, 26 Apr 2016 01:08 AM IST
नवीन सक्सेना, हल्द्वानी।
नवीन सक्सेना, हल्द्वानी। Updated Tue, 26 Apr 2016 01:08 AM IST
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Wardrobe captivity books, reading None
लाइब्रेरी - फोटो : अमर उजाला
राजकीय बालिका इंटर कालेज कालाढूंगी रोड के एक कमरे में जिला शाखा लाइब्रेरी चल रही है। इसमें पढ़ने की हजारों पुस्तकें भी हैं और रोजाना अखबार भी आते हैं पर इन्हें पढ़ने वाला कोई नहीं है। हाल यह है कि लाइब्रेरी में इस साल आई किताबें डिब्बे से बाहर तक नहीं निकल पायी हैं । लाइब्रेरी चलती रहे इसलिए इसके मेंबर विद्यालय की शिक्षिकाओं को बना दिया गया तथा बाहरी लोगों को तो लड़कियों का स्कूल होने के कारण लाइब्रेरी तक पहुंचना ही मुश्किल है।
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  पुस्तक प्रेमियों की सुविधा के लिए कालाढूंगी रोड पर स्थित राजकीय बालिका इंटर कालेज के एक कोने में बने कमरे में वर्ष 1988 में जिला शाखा लाइब्रेरी स्थापित की गई थी। लेकिन यह लाइब्रेरी किसी भी पुस्तक प्रेमी को ढूंढे नहीं मिल सकती। जिला शाखा लाइब्रेरी होने के नाते इसमें प्रतिदिन हिंदी, अंग्रेजी के आधा दर्जन राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्र भी आते हैं। लेकिन अखबारों को पढ़ने कोई नहीं आता। इसमें धार्मिक ग्रंथ, चारों वेदों के अलावा महापुरुषों से संबंधित पुस्तकें, साहित्यिक, कहानी लेखन, उपन्यास समेत विभिन्न प्रकार की छह हजार से अधिक किताबें अलमारियों में कैद हैं।
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युवाओं से संबंधित कंप्टीशन और जनरल मोटीवेशन  की पुस्तकें भी शामिल हैं। गर्मियों के सीजन में सुबह साढ़े सात बजे से जिस समय लाइब्रेरी खुलती है। उसी समय से विद्यालय लगने की वजह से कालेज का गेट बंद हो जाता है जिस कारण लाइब्रेरी में कोई प्रवेश नहीं कर सकता। इस लाइब्रेरी 28 वर्षों में केवल 60 मेंबर ही हैं। खाली समय में शिक्षिकाएं इसमें बैठकर बतियाती रहती हैं। इस जिला शाखा लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन समेत दो कर्मचारी तैनात हैं। इनके वेतन और अन्य साज-सज्जा आदि पर प्रतिवर्ष करीब 10 लाख रुपये खर्च आता है। 
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लाइब्रेरी के पास अपना भवन न होने के कारण कमरे की मरम्मत तक नहीं करवा सकते हैं। पुस्तकें खरीदने का कार्य निदेशालय स्तर पर होता हैं। निदेशालय से हमें पिछले वर्ष 550 पुस्तकें मिली थीं लेकिन जगह न होने के कारण इनको डिब्बे से तक नहीं निकाल पाए। इनकी इंट्री कर फिर डिब्बे में बंद कर रखना पड़ा। लाइब्रेरी का भवन बन जाएगा तो पाठकों को ज्यादा फायदा मिल सकेगा। 

- किरन जोशी, लाइब्रेरीयन
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लाइब्रेरी निर्माण को मंजूर हैं 10 लाख 
कलकत्ता के राजा राममोहन राय ट्रस्ट से लाइब्रेरी के लिए नया भवन निर्माण को 10 लाख रुपये मंजूर हैं। यह धनराशि पिछले साल से निदेशक के खाते में पड़ी है। लेकिन राशि कम होने के कारण इस योजना पर काम शुरू नहीं हो सका। अब जिलाधिकारी द्वारा इस लाइब्रेरी को हाईटैक बनाने की योजना है। जीजीआईसी के बाहरी हिस्से में लाइब्रेरी भवन बनाने के लिए आरईएस द्वारा प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।  
- आरएल आर्या, मुख्य शिक्षा अधिकारी
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