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Uttarakhand: कुमाऊं का सबसे बड़ा अस्पताल है एसटीएच, फिर भी शौचालयों के दरवाजे टूटे; महिलाएं हो रहीं शर्मसार

Wed, 31 Jan 2024 02:04 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 31 Jan 2024 02:04 PM IST
सार

हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में महिला शौचालयों की हालत बेहद खराब है। अस्पताल के शौचालयों के दरवाजे टूटे हुए हैं, जबकि गंदगी के कारण इनका इस्तेमाल करना भी महिलाओं के लिए दुश्वार है। 

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Uttarakhand News: Toilet doors are broken in Sushila Tiwari hospital haldwani
सुशीला तिवारी अस्पताल - फोटो : सुशीला तिवारी अस्पताल

विस्तार

कुमाऊं के सबसे बड़े अस्पताल सुशीला तिवारी में महिला शौचालयों की हालत बेहद खराब है। शौचालयों के दरवाजे टूटे हुए हैं, जबकि गंदगी के कारण इनका इस्तेमाल करना भी महिलाओं के लिए दुश्वार है। ऐसे में अस्पताल में आने वाले मरीजों के महिला तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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सुशीला तिवारी अस्पताल में हर दिन साढ़े पांच हजार से अधिक मरीज, उनके तीमारदार पहुंचते हैं। मगर यहां मरीजों के लिए बने शौचालयों की स्थिति सही नहीं हैं। शौचालयों के दरवाजे और खिड़कियां टूटी हुई हैं। अस्पताल में एक भी महिला शौचालय इस्तेमाल करने लायक नहीं है। मंगलवार को शौचालय गंदगी से भरे मिले, जिससे मरीज को इंफेक्शन का खतरा है।

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एसटीएच कुमाऊं का सबसे बड़ा रेफर अस्पताल है, जहां कुमाऊं के सभी अस्पतालों के साथ ही उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों से भी मरीजों को रेफर कर भेजा जाता है। वहीं अस्पताल में हर दिन औसतन 1400 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। हर मरीज के साथ दो-तीन तीमारदार भी होते हैं। जबकि 550 मरीजों को यहां भर्ती किया जाता है। उनके साथ ही तीमारदार भी पहुंचते हैं। हाल यह रहता है कि मरीजों के साथ कई बार पूरा परिवार ही तीमारदार बनकर अस्पताल में डेरा जमा ले रहे हैं।
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इनके साथ ही अस्पताल में लगभग 2000 कर्मचारी भी कार्यरत है। मगर इसके बाद भी अस्पताल में शौचालयों की सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों को गंदे शौचालयों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे बीमार होने का भी खतरा रहता है। अस्पताल में भर्ती एक महिला मरीज रूकसार ने कहा कि शौचालय हमेशा गंदे ही रहते है। इन शौचालयों को इस्तेमाल करना मजबूरी है। एक अन्य महिला मरीज केसर ध्यान का कहना है कि शौचालय तो यहां हमेशा ऐसे ही रहते हैं। हम केवल दो या तीन दिन के लिए भर्ती होते है, तो हम किसी से क्या ही कहें।

वहीं अस्पताल प्रबंधन की मानें तो अस्पताल में सफाई कर्मी आउट सोर्स से आते है। शौचलायों की सफाई सुबह 8 बजे, दिन मे 2 बजे और शाम में 8 बजे की जाती है। मरीजों के साथ ही तीमारदार भी इन्हीं शौचालयों इस्तेमाल करते हैं। इस कारण गंदे होते हैं।

 

कुछ महिला वार्डों से ऐसी शिकायतें आयी हैं, जिनको दिखवाकर सही करवाने के संबंध में निर्देशित किया गया है। -डा. अरुण जोशी, प्राचार्य, सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी

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