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भगतदा का जनमत संग्रह विरोध: सीएम धामी को लिखा पत्र, कहा- संसद-विधानसभा तय करते हैं कौन संस्था...विभाग कहां रहे

Wed, 15 May 2024 07:45 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 15 May 2024 07:45 AM IST
सार

नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्टिंग के मुद्दे पर उत्तराखंड के पूर्व सीएम और महाराष्ट्र और गोवा के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सीएम पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजा है। कोश्यारी ने हाईकोर्ट को शिफ्ट करने के मुद्दे पर 13 मई को पत्र भेजने की पुष्टि की।

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Uttarakhand High Court News: bhagat singh koshyari opposed referendum
bhagat singh koshyari - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्टिंग के मुद्दे पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र और गोवा के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजा है। कोश्यारी का कहना है कि वह कानून के विद्यार्थी तो नहीं हैं लेकिन लंबे समय तक संसद और विधान मंडल सदस्य में रहे हैं और इतना जानते हैं कि राज्य की कौन संस्था, विभाग कहां रहे इसका निर्णय संसद या विधान मंडल ही करते आए हैं। यदि न्यायालय इस संबंध में निर्णय लेने लगेंगे तो पीआईएल कर्ता किसी भी विभाग, जिला व तहसील आदि की मांग को लेकर न्यायालय पहुंच जाएंगे व इसमें संविधान द्वारा केंद्र या प्रदेश सरकारों को दिए गए अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप की संभावना बढ़ जाएगी।

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ये पढ़ें- Uttarakhand: 'मैं कानून का विद्यार्थी नहीं हूं लेकिन...हाईकोर्ट शिफ्टिंग पर पूर्व सीएम कोश्यारी का फूटा गुस्सा

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पत्र में उन्होंने हाईकोर्ट के लिए जनमत संग्रह जैसी प्रथा से बचने का भी सुझाव दिया है। कहा है कि यदि ऐसा हुआ तो भविष्य में इसके दुरूपयोग की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।

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अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में कोश्यारी ने हाईकोर्ट को शिफ्ट करने के मुद्दे पर 13 मई को सीएम धामी को पत्र भेजने की पुष्टि की। पत्र में कहा है कि हाईकोर्ट ने उच्च न्यायालय को नैनीताल से अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिए नए स्थान खोजने के निर्देश दिए हैं। कहा है कि राज्य बनाते समय विचार विमर्श के बाद देहरादून को तात्कालिक राजधानी और नैनीताल में उच्च न्यायालय बनाने का निर्णय लिया गया। नैनीताल में अंग्रेजों के समय से ही राजभवन, सचिवालय आदि बनाए गए हैं, यह उत्तर प्रदेश की गर्मियों की राजधानी के रूप में भी प्रयुक्त होता रहा है किंतु नए राज्य में नैनीताल को राजधानी बनाने से मंत्रियों, विशिष्ट जनों की अधिकता से स्थानीय पर्यटन व जनजीवन को बाधा पहुंचने की संभावना को देखते हुए यहां क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर हाईकोर्ट की स्थापना की गई।

पत्र में कहा गया है कि जहां तक नैनीताल हाईकोर्ट को अन्यत्र शिफ्ट करने का प्रश्न है, उनकी जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार इससे पहले से ही सहमत है। यह भी कहा है कि उच्च न्यायालय ने अपने निर्देश में स्वयं कहा है कि (निर्देश संख्या 13 एवं 14 डी) हाईकोर्ट की फुल बैंच ने गौलापार हल्द्वानी में कोर्ट को स्थापित करने की प्रक्रिया पर सहमति दी थी।

वैकल्पिक स्थान खोजने से निर्देश से फैलेगा असंतोष
कोश्यारी की ओर से सीएम को भेजे पत्र के बिंदु संख्या छह में कहा है कि शासन प्रशासन ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए गौलापार में लगभग 26 बीघा जमीन का चयन कर वन विभाग से अनापत्ति के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली है तथा केंद्रीय वन एवं पर्यावरण विभाग से इस पर विचार कर 26 बीघा जमीन को अधिक बताते हुए इसे कुछ कम करने के लिए प्रदेश सरकार को निर्देशित किया गया है। इसमें क्षतिपूर्ति के लिए वन विभाग ने अन्यत्र वन लगाने के लिए जमीन का भी चयन कर लिया है। कोश्यारी का कहना है कि अब ऐसे में अन्यत्र वैकल्पिक स्थान ढूंढने के लिए दिए गए निर्देश से क्षेत्र में असंतोष फैलने की संभावना से नकारा नहीं जा सकता है। कहा है कि उक्त प्रस्तावित स्थान अभिलेखों में रौखड़ के रूप में दर्शाया गया है और उक्त स्थान पर अधिकांश पेड़ केवल चार से छह इंच मोटाई के ही हैं। माई सिटी रिपोर्टर

केंद्र सरकार या सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से निकाला जाए समाधान
सीएम को भेजे पत्र में कोश्यारी ने कहा है कि न्यायालय ने अपने आदेश में स्वयं ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि अधिवक्ताओं को वर्चुअल या आन लाइन बहस करने का अभ्यास डालना चाहिए। कहा है कि गौलापार में हाईकोर्ट बन जाने से हल्द्वानी में सभी प्रकार की सरकारी और निजी अस्पतालों के माध्यम से चिकित्सा की उचित सुविधा उपलब्ध हो जाएगी और यहां से हवाई अड्डा तक 20-25 मिनट में पहुंचा जा सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस संबंध में शासन की ओर से केंद्र सरकार या सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से शीघ्र समस्या का समाधान निकाला जाए। 

सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुआ कोश्यारी का पत्र
पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी की ओर से सीएम धामी को भेजा गया पत्र सोमवार को सोशल मीडिया में खूब वायरल होता रहा। यही नहीं पत्र के वायरल होते ही हाईकोर्ट शिफ्टिंग के मुद्दे को लेकर बाजार से लेकर भाजपा कार्यालय तक में जमकर चर्चाएं हुई। चर्चाओं के दौरान कोई भी व्यक्ति हाईकोर्ट को कुमाऊं से बाहर स्थानांतरित करने का पक्षधर नहीं दिखा। 

 

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