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Nainital: HC ने बलियानाले से संबंधित जनहित याचिका निस्तारित की, कहा- गुणवत्ता में कमी मिले तो, कोर्ट को बताएं

Wed, 20 Mar 2024 02:32 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 20 Mar 2024 02:32 PM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने बलियानाले में हो रहे भूस्खलन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है। 

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Uttarakhand High Court hears PIL filed regarding landslide in nainital
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने बलियानाले में हो रहे भूस्खलन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि अगर उन्हें लगता है कि कार्य की गुणवत्ता में कोई कमी पाई जाती है तो वह फिर से प्रार्थना पत्र के माध्यम से कोर्ट को अवगत करा सकते हैं।

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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि सरकार ने इसके ट्रीटमेंट के लिए टेंडर निकालकर कार्य प्रारंभ कर दिया है और कार्य प्रगति पर है। सरकार के इस कथन पर कोर्ट ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले कि सुनवाई हुई।

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मामले के अनुसार नैनीताल निवासी अधिवक्ता सैय्यद नदीम मून ने 2018 में उच्च न्यायालय में जनहित दायर कर कहा था कि नैनीताल के आधार कहे जाने वाले बलियानाले में हो रहे भूस्खलन से नैनीताल व इसके आसपास रह रहे लोगों को बड़ा खतरा हो सकता है। नैनीताल के अस्तित्व और लोगों को बचाने के लिए इसमें हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए कोई ठोस उपाय किया जाय, ताकि क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन को रोका जा सके।


याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि 2018 से इस पर शासन व कार्यदायी संस्था ने स्थानीय लोगो के हितों का ध्यान नहीं दिया। बरसात के समय यहां पर निवास कर रहे लोगों को अन्य जगह शिफ्ट किया जाता रहा है। 2018 में उनके द्वारा इसे बचाने के लिए जनहित याचिका दायर की गई लेकिन सरकारों ने कोर्ट के आदेशों पर इसका सर्वे ही किया, कार्य कम किया।

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