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उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने चमोली के हेलीपैड अधिग्रहण को ठहराया गैर-कानूनी, जानें पूरा मामला

Thu, 27 Aug 2026 12:13 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Thu, 27 Aug 2026 12:13 AM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने चमोली जिले के गोविंद घाट स्थित हेलीपैड के अस्थाई अधिग्रहण को गैर-कानूनी और प्रक्रियागत नियमों का उल्लंघन करार दिया है। 

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Uttarakhand High Court declares Chamoli helipad acquisition illegal
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने चमोली जिले के गोविंद घाट स्थित हेलीपैड के अस्थाई अधिग्रहण को पूरी तरह से गैर-कानूनी और प्रक्रियागत नियमों का उल्लंघन करार दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने मामले में फैसला सुनाते हुए जिला प्रशासन चमोली द्वारा 23 मई 2024 और 27 जून 2025 को जारी किए गए अधिग्रहण आदेशों को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013 की धारा 81(2) के तहत किसी भी संपत्ति के अस्थाई अधिग्रहण से पूर्व प्रभावित पक्ष को लिखित नोटिस और पर्याप्त समय देना अनिवार्य था, जिसका पालन करने में राज्य प्रशासन पूरी तरह विफल रहा।

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यह मामला मैसर्स डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिकाओं से जुड़ा है। कंपनी वर्ष 2011 से गोविंद घाट से श्री हेमकुंड साहिब जी के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन कर रही थी और उसने निजी भूस्वामियों से लीज पर जमीन लेकर भारी लागत से वहां हेलीपैड व यात्री लाउंज विकसित किया था। मई 2024 में चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा की शुरुआत के दौरान, नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने जल्दबाजी में आपात स्थिति का हवाला देते हुए हेलीपैड का ताला तोड़कर कब्जा ले लिया था और उसका संचालन पवन हंस लिमिटेड को सौंप दिया था।
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि यात्रा सीजन के कारण जनहित में यह कदम उठाना आवश्यक था और कंपनी की लीज अवधि का पंजीकरण समाप्त हो चुका था। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि 24 घंटे का समय देकर या बिना पूर्व सूचना के किसी की संपत्ति का अधिग्रहण करना कानून का उल्लंघन है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपंजीकृत लीज के बावजूद कंपनी वहां वास्तविक कब्जे में थी और 2013 अधिनियम की धारा 3(एक्स) के तहत हितबद्ध व्यक्ति की श्रेणी में आती है, जिसे नोटिस पाने और अपनी बात रखने का विधिक अधिकार है। कोर्ट ने चमोली के जिलाधिकारी को आदेश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर गोविंद घाट स्थित हेलीपैड का पूरा नियंत्रण और कब्जा याचिकाकर्ता कंपनी को वापस सौंपें तथा कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट जमा करें।
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इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अवैध अधिग्रहण की पूरी अवधि के लिए कंपनी को यूकाडा की हेलीपैड नीति 2023-24 अथवा लैंडिंग दर सूची 2018 की बाजार दरों के अनुसार उचित मुआवजा और लैंडिंग शुल्क का भुगतान किया जाए। 

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